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पसन्दीदा चिट्ठों और वेबसाईट्स की कोई पोस्ट न छूटे : गूगल रीडर

गू रीडर आपके पसन्दीदा चिट्ठों और समाचार वेब साइटों में प्रकाशित हर नई सामग्री की खबर रखता है । चिट्ठा या साइट पर प्रतिदिन नई पोस्ट प्रकाशित होती हो अथवा महीने में एक बार , यह पक्का है कि गूगल रीडर की मदद से इनमें से एक भी आपकी नजर से नहीं बचेगी ।

यह जरूर है कि चिट्ठों या वेब साईट्स का चयन आपको करना होगा । ब्लॉगवाणी की तरह कोई और चिट्ठों को इस जुगाड़ से नहीं जोड़ेगा। चयन आपके हाथ में हो तो नापसन्द चिट्ठों से मुक्त रह पाना भी इस प्रक्रिया में अन्तर्निहित है । नित नये – नये चिट्ठों को जोड़ते रहना आपका काम होगा। आपके द्वारा जोड़े गये चिट्ठों की हर नई पोस्ट आप तक पहुंचाना गूगल रीडर का काम है । आप नापसन्दगी के आधार पर यदि किन्हीं चिट्ठों को अपने रीडर से नहीं जोड़ेंगे तो भी वे चिट्ठे वाले गिला-शिकवा व्यक्त न कर सकेंगे,जैसा एग्रीगेटर्स के संचालकों को झेलना पड़ता है।

आपको मिलने वाली इस व्यक्तिगत आजादी के साथ आप अपने पसन्द की पोस्टों की फ़ेहरिस्त को सार्वजनिक भी कर सकते हैं । आपके मुरीद इस फ़ेहरिस्त से जान सकेंगे कि आपको कौन सी पोस्ट पसन्द आईं । मेरे पसन्दीदा चिट्ठेकारों में एक अभय तिवारी गूगल रीडर के इस जुगाड़ का उपयोग बखूबी करते हैं । उनकी पसन्दीदा पोस्टों की ताजा फ़ेहरिस्त देखिए ! अपनी फ़ेहरिस्त को आप अपने चिट्ठे पर भी लगा सकते हैं । अभय ने ’मेरी सिफ़ारिश’ के तहत इस फ़ेहरिस्त के विजेट को अपने ब्लॉग पर लगाया है। लगाने का तरीका यहां बताया गया है ।

बहरहाल , जी-मेल खाताधारक ऐसे बढ़ें:

(जो जी-मेल खाता नहीं अपनाने चाहते वे भी अपना जीमेल से इतर ई-मेल नाम की जगह डालकर गूगल रीडर का खाता खोल सकते हैं):

१.जी-मेल के इनबॉक्स के पेज पर ऊपर बांए कोने पर (जहां जीमे लिखा है उसके ऊपर) गौर करें । ओर्कुट , जीमेल , कैलेन्डर,वेब,डॉक्युमेन्ट्स,मोर लिखे हुए टैब्स पायेंगे। इनमें ’मोर’ पर खटका मारने पर कई विकल्प नीचे खुलेंगे। इनमें ’रीडर’ चुन लें ।

२. रीडर पर लॉग इन होने के बाद जो पेज खुलेगा उसमें ऊपर बांयीं तरफ़ ’एड अ सबस्क्रिप्शन’ के टैब पर खटका मार कर चाहे जितने पसन्दीदा (नापसन्द चिट्ठों का हाल भी देखना चाहते होंगे)चिट्ठे का यू आर एल एक के बाद एक पेस्ट करते जांए । तुरन्त उनकी पोस्ट प्रकट होंगी। जब भी आप रीडर खोलेंगे,नई पोस्ट (यदि हों) प्रकट होंगी। एग्रीगेटर्स के द्वारा आप यही करते थे,न?

३. दिल-दिमाग-मिजाज के हिसाब से अपने दोस्तों की पसन्द आप जानना चाहते होंगे। ब्लॉगवाणी के मैथिली गुप्त बताते हैं कि संजाल पर आने वाले वक्त में समुदायों का महत्व बढ़ जाएगा। दिल-दिमाग-मिजाज के आधार पर अपनी पसन्द को साझा करने पर हम इस दिशा में बढ़ेंगे। रीडर इस दिशा में मददगार है । शेरिंग सेटिंग्स (बांये हाशिए पर) पर खटका मारने के बाद अपने दोस्तों को खोज सकेंगे । अपनी पसंद को सार्वजनिक करना या न करना तय कर सकेंगे।

गूगल रीडर की बाबत ये कुछ मामूली जानकारियां हैं । गहरे जाने के लिए इन लेखों तथा इन विडियो को पढ़ें ,देखें-सुनें,गुनें । गुगल रीडर से सम्बन्धित चर्चा का फ़ोरम भी सक्रिय है ।

कुछ पुराने मित्रों ने सलाह दी कि बिना ब्लॉगवाणी के इस दौर में गूगल रीडर की चर्चा करनी बहुत जरूरी है ।

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चिट्ठे की प्रविष्टी ‘वर्ड’ पर कैसे चेपें?

    कई बार चिट्ठों पर छपी प्रविष्टियों को ‘वर्ड’ (माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस वर्ड) पर चेपने , छापने की जरूरत होती है ।  मामूली सी जानकारियों के अभाव में ‘वर्ड’ पर चिपकाने के बाद आप पाते हैं कि वह देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी के बजाए कोई विचित्र सी लिपि और भाषा प्रकट हो गई है ।

चिट्ठों पर छपी सामग्री ‘यूनिकोड’ आधारित होती है तथा ‘वर्ड’ के पृष्ट पर चेपते वक्त यदि फ़ॉन्ट का चयन सही (यूनिकोड आधारित)  नहीं हुआ तब विचित्र अक्षर दिखते हैं।

‘वर्ड’ के दस्तावेज के रूप में चिट्ठे की सामग्री चेपते वक्त ऊपरी बाँए कोने पर सही फॉन्ट चुनें । हिन्दी के चिट्ठों की तरह Mangal एवं Arial Unicode MS  भी यूनिकोड आधारित हैं इसलिए इनमें से किसी  फॉन्ट को चुनने पर आप ‘विचित्र’ सामग्री नहीं पायेंगे अपितु पठनीय सामग्री पायेंगे ।

 ‘वर्ड’ का दस्तावेज आप ऑफ़लाइन  भी तैयार कर सकते हैं । हिन्दी चिट्ठों की प्रविष्टियों के लिए ‘वर्ड’ पर सामग्री बिना नेट से जुड़े (ऑफ़लाइन) तैयार करनी हो तब भी आप को Mangal अथवा Arial Unicode MS चुनना होगा ।

इन्टरनेट के किसी पृष्ट को बचा कर रखने (save) में  कम्प्यूटर का कहीं ज्यादा स्थान जाया होता है ।

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