[ जयपुर के नगीना उद्योग के बाल – श्रमिकों से … वरिष्ट पत्रकार सुधेन्धु पटेल ]
मेरे बच्चों
मुझे माफ़ न करना !
कि किलकारियों को भूख की नोक पर
उछाल – उछालकर
सिसकारियों में बदला है मैंने ही ।
कि नाजुक उंगलियों के पोरों पर
आखरों के फूल नहीं ,
उगाये हैं तेजाबी फफोले मैंने ही ।
कि कोपल – से उगते सपनों पर
चिंदी – चिंदी आग
स्पर्श की जगह छितराये मैंने ही ।
ना बच्चों
माफ़ नकरना हमें
जब तक तुम्हा्री
पारदर्शी आंखों के सामने
प्रायश्चित न कर लूँ मैं ।
– सुधेन्दु पटेल
ई-पता patelsudhendu@gmail.com