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बाल साहित्य

Dear Aflatoon Bhai,

With the help of many friends we were able to translate over 40 Children’s books translated in Hindi in the month of June 2022.
I hope you like them. It will be kind if you can share them with those who may cherish them. We are deep into translating good books into Hindi.

Many thanks.

love and peace

arvind

अबाबील के गीत (सचित्र), हिंदी, पुरुस्कृत पुस्तक, बालसाहित्य, लियो पोलिटी 01.06.2022
https://archive.org/download/ababeel-ke-geet-h/ababeel-ke-geet%20-%20H.pdf

अब मुझे उड़ने दो – एक गुलाम परिवार की कहानी (सचित्र), हिन्दी, बालसाहित्य, 02.06.2022
https://archive.org/download/gulam-parivar-kahaani-h/gulam-parivar-kahaani%20-%20H.pdf

गैलीलियो (सचित्र), महान वैज्ञानिक, हिन्दी, बालसाहित्य, मैकडोनाल्ड 03.06.2022
https://archive.org/download/galileo-popular-h/GALILEO%20-%20POPULAR%20-%20H.pdf

पास्कुअल की जादुई तस्वीरें (सचित्र), हिंदी, बालसाहित्य, एमी 03.06.2022
https://archive.org/download/pascal-photo-h/PASCAL-photo-%20H.pdf

फिलिस की बड़ी परीक्षा (सचित्र), हिंदी, बालसाहित्य, कैथरीन 04.06.2022
https://archive.org/download/filis-wheatley-pareeksha-h/filis-wheatley-pareeksha%20-%20H.pdf

मैं, गैलीलियो (सचित्र), हिंदी, प्रेरक जीवनी, बालसाहित्य, बोनी 05.06.2022
https://archive.org/download/i-galileo-h/I%20GALILEO%20-%20H.pdf

लालिबेला की सर्वश्रेष्ठ मधुमक्खी पालक (सचित्र), अफ्रीका की कहानी, हिंदी, बालसाहित्य, क्रिस्टीना 07.06.2022
https://archive.org/download/lalibela-h/LALIBELA%20-%20H.pdf

बिक्री के लिए बंदर (सचित्र), एक अफ्रीकी कहानी, हिंदी, बालसाहित्य, सना 07.06.2022
https://archive.org/download/bikri-bandar-h/bikri-bandar%20-%20H.pdf

बहुत सारे खरगोश (सचित्र), हिंदी, बालसाहित्य, पैगी 08.06.2022
https://archive.org/download/bahut-khargosh-h/bahut-khargosh%20-%20H.pdf

बन्दर पुल (सचित्र), हिंदी, बालसाहित्य, प्रेरक, जातक कथा 08.06.2022
https://archive.org/download/bandar-pul-h/bandar-pul%20-%20H.pdf

कौन थे डॉ. सूस? (सचित्र), हिन्दी, प्रेरक जीवनी, जैनेट बी. पास्कल, चित्र: नैन्सी हैरिसन, भाषान्तर: पूर्वा याज्ञिक कुशवाहा 09.06.2022
https://archive.org/download/kaun-doctor-soos-h/kaun-doctor-soos%20-%20H.pdf

माणिक राजकुमार, भारतीय कहानी (सचित्र) – हिंदी – बालसाहित्य 09.06.2022
https://archive.org/download/manik-rajkumar-h/manik-rajkumar-%20H.pdf

स्वतंत्रता नदी पर दोस्त (सचित्र), गुलामों का पलायन, हिंदी, बालसाहित्य,  09.06.2022
https://archive.org/download/nadi-palayan-gulam-h/nadi-palayan-gulam%20-%20H.pdf

सोने की चमक – कैलिफ़ोर्निया गोल्ड-रश की कहानी (सचित्र), हिंदी, बालसाहित्य, चित्र: अन्ना, स्टीफन 10.06.2022
https://archive.org/download/gold-rush-h/gold-rush-%20H.pdf

दूध से लेकर आइसक्रीम तक (सचित्र), हिंदी, बालसाहित्य, अली 10.06.2022
https://archive.org/download/doodh-se-icecream-H/doodh-se-icecream-H.pdf

जानवर से जूतों तक (सचित्र), हिंदी, बालसाहित्य, अली 10.06.2022
https://archive.org/download/janwar-se-joote-h/janwar-se-joote-%20H.pdf

कपास से लेकर पतलून तक (सचित्र), हिंदी, बालसाहित्य, अली 11.06.2022
https://archive.org/download/kapas-se-patloon-h/kapas-se-patloon%20-%20H.pdf

रेत से कांच तक (सचित्र), हिंदी, बालसाहित्य, अली 11.06.2022
https://archive.org/download/ret-se-kaanch-h/ret-se-kaanch-%20H.pdf

चुकंदर से चीनी तक (सचित्र), हिंदी, बालसाहित्य, अली 11.06.2022
https://archive.org/download/chukandar-se-cheeni-h/chukandar-se-cheeni%20-%20H.pdf

डायनासोर से लेकर जीवाश्म तक (सचित्र) , हिंदी, बालसाहित्य,  एनेगर्ट 11.06.2022
https://archive.org/download/dino-se-jeevanshm-h/dino-se-jeevanshm%20-%20H.pdf

ट्राएंगल फैक्ट्री में लगी आग (सचित्र), हिंदी, बालसाहित्य, होली 12.06.2022
https://archive.org/download/factory-fire-h/factory-fire%20-%20H.pdf

जॉर्जिया ओ’कीफ़ी – आर्टिस्ट (सचित्र), हिंदी, बालसाहित्य, प्रेरक जीवनी, 12.06.2022
https://archive.org/download/okeefee-artist-h/OKEEFEE-ARTIST-%20H.pdf

लियोनार्डो और उड़ने वाला लड़का – लियोनार्डो दा विंची की कहानी (सचित्र), हिंदी, बालसाहित्य, लॉरेंसन 13.06.2022
https://archive.org/download/vinci-udne-vala-ladka-h/vinci-udne-vala-ladka%20-%20H.pdf

मार्था वाशिंगटन (सचित्र), हिंदी, बालसाहित्य, जीवनी, कैंडिस 13.06.2022
https://archive.org/download/martha-wash-h/martha-wash%20-%20H.pdf

बुद्धिमान बन्दर की कथा (सचित्र), हिन्दी, बालसाहित्य, बेट्सी 14.06.2022
https://archive.org/download/budhiman-bandar-h/budhiman-bandar%20-%20H.pdf

गरीब फेरीवाला – प्रचीन अरबी कहानी (सचित्र), हिंदी, बालसाहित्य, फ्लाविया 15.06.2022
https://archive.org/download/garib-feriwala-h/garib-feriwala-%20H.pdf

हैरिएट टबमैन (सचित्र), हिन्दी, बालसाहित्य, प्रेरक जीवनी, लेखन: पॉली कार्टर, चित्र: ब्रायन पिंकने, भाषान्तरः पूर्वा याज्ञिक कुशवाहा 15.06.2022
https://archive.org/download/harriet-nayee-h/harriet-nayee%20-%20H.pdf

सिकोयाह – जिस चैरुकी आदमी ने अपने लोगों को लिखाई दी, हिंदी, IBA 15.06.2022
https://archive.org/download/sekuoyah-h/SEKUOYAH%20-%20H.pdf

रूथ और ग्रीन बुक (सचित्र), हिन्दी, बालसाहित्य, केल्विन 16.06.2022
https://archive.org/download/gulam-green-buk-h/gulam-green-buk%20-%20H.pdf

“यूनियन” पतंग की उड़ान (सचित्र), हिन्दी, सच्ची कहानी, बालसाहित्य, टेकला 17.06.2022
https://archive.org/download/patang-niagra-h/patang-niagra%20-%20H.pdf

उम्मीद का झरना (सचित्र), सत्यकथा, अफ्रीकी कहानी, हिंदी, बालसाहित्य, एरिक 18.06.2022
https://archive.org/download/ummeed-ka-jharna-h/ummeed-ka-jharna%20-%20H.pdf

बेन फ्रैंकलिन की पहली पतंग (सचित्र), हिंदी, बालसाहित्य, स्टीफन 19.06.2022
https://archive.org/download/ben-pehli-patang-h/ben-pehli-patang%20-%20H.pdf

अनाथों का जन्मदिन (सचित्र), अफ़्रीकी सत्यकथा, हिंदी, बालसाहित्य, एरिक 19.06.2022
https://archive.org/download/anath-janmdin-h/anath-janmdin%20-%20H.pdf

चल सप्तर्षि के पीछे! (सचित्र) – हिंदी – बालसाहित्य, बर्नडीन कॉनली, चित्र: इवान ब्युकानैन, भाषान्तर: पूर्वा याज्ञिक कुशवाहा 21.06.2022
https://archive.org/download/saptrishi-peecha-karo-h/saptrishi-peecha-karo%20-%20H.pdf

नौ शांति दूत (सचित्र), हिंदी, प्रेरक जीवनियां, बालसाहित्य, अनाम 21.06.2022  
https://archive.org/download/peace-heroes-h/PEACE%20HEROES%20-%20H.pdf

ला-लोरोना – मेक्सिकन भूतनी की कहानी, हिंदी, बालसाहित्य, मेक्सिकन 22.06.2022  
https://archive.org/download/mexican-bhootni-h/mexican-bhootni%20-%20H.pdf

आंटी क्लारा ब्राउन (सचित्र), हिन्दी, बालसाहित्य, प्रेरक जीवनी, लिंडा  23.06.2022  
https://archive.org/download/auntie-clara-h/auntie-clara-%20H.pdf

मेरे पापा काम पर नहीं जाते! (सचित्र), हिन्दी, बालसाहित्य, मदीना 24.06.2022  
https://archive.org/download/papa-no-naukri-h/papa-no-naukri-%20h.pdf

मिस्र की नावें (सचित्र) – हिन्दी – बालसाहित्य, जेफ्री स्कॉट 24.06.2022  
https://archive.org/download/mistr-ki-naaven-h/mistr-ki-naaven%20-%20H.pdf

दीवार तोड़ना – काले छात्रों का संघर्ष (सचित्र), हिंदी, बालसाहित्य, मार्क 25.06.2022
https://archive.org/download/deewar-todna-h/deewar-todna-%20h.pdf

सीज़र शावेज़ (सचित्र), हिन्दी, बालसाहित्य, प्रेरक जीवनी, लेखन: जिंजर वैडस्वर्थ, भाषान्तर: पूर्वा याज्ञिक कुशवाहा 25.06.2022
https://archive.org/download/neta-chavez-h/neta-chavez-%20H.pdf

विवा मेक्सिको! बेनिटो जुआरेज़ की कहानी (सचित्र), हिंदी, प्रेरक जीवनी 26.06.2022
https://archive.org/download/benito-juarez-new-h/BENITO%20JUAREZ%20NEW%20-%20H.pdf

एस्तेर मोरिस ने महिलाओं को मतदान कराया (सचित्र), हिंदी, बालसाहित्य, 27.06.2022
https://archive.org/download/morris-vote-women-h/morris-vote-women%20-%20H.pdf

लीफ एरिकसन (सचित्र), हिंदी, बालसाहित्य, लेखन: शेनॉन क्नूडसन, भाषान्तर: पूर्वा याज्ञिक कुशवाहा 29.06.2022
https://archive.org/download/leif-viking-h/LEIF%20VIKING%20%20-%20H.pdf

बेसी कोलमैन – पहली अफ्रीकी-अमीरकी महिला पायलट, हिन्दी, बालसाहित्य, 29.06.2022
https://archive.org/download/bessie-coleman-h/BESSIE%20COLEMAN%20-%20H.pdf

कौन हैं मलाला यूसुफजई?, हिंदी, बालसाहित्य,  प्रेरक जीवनी, दीना 30.06.2022

Arvind Gupta
Flat 401, Chitrakoot,

Building B, 1065, Gokhale Cross Road

(Near Symbiosis Institute of Distance Learning)
Model Colony, Pune 411016
+917350288014
Preferred Email: arvindtoys@gmail.com
http://arvindguptatoys.com

प्रिय अरविंद भाई,

 बाल-साहित्य की पीडीएफ कड़ियाँ पाकर खुशी हुई। मैं अपने संपर्कियों में इन्हें साझा करूंगा।

https://shaishav.wordpress.com पर भी साझा करूंगा।

आपको बहुत शुक्रिया और सुकामना।

सप्रेम,

अफ़लातून

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चलो दिल्ली ! – श्यामनारायण पाण्डेय

आज नेताजी की जन्म तिथि है। उन्होंने रंगून से ‘चलो दिल्ली’ का जब आवाहन किया था तब श्यामनारायण पांडे ने कविता लिखी थी। अंग्रेजों ने इसे प्रतिबंधित कर दिया था। मैंने ’74 के आसपास याद की थी।एक लाइन भूला हूँ,किसी को याद हो तो बता दें,आभारी रहूँगा।
रगों में खूँ उबलता है,
हमारा जोश कहता है।
जिगर में आग उठती है,
हमारा रोष कहता है।
उधर कौमी तिरंगे को,
संभाले बोस कहता है।
बढ़ो तूफ़ान से वीरों,
चलो दिल्ली ! चलो दिल्ली!
अभी आगे पहाड़ों के,
यहीं बंगाल आता है,
हमारा नवगुरुद्वारा,
यही पंजाब आता है।
जलाया जा रहा काबा,
लगी है आग काशी में,
युगों से देखती रानी,
हमारी राह झांसी में।
जवानी का तकाजा है,
रवानी का तकाजा है,
तिरंगे के शहीदों की
कहानी का तकाजा है।
बुलाती है हमें गंगा,
बुलाती घाघरा हमको।
हमारे लाडलो आओ,
बुलाता आगरा हमको।
…… ने पुकारा है,
हमारे देश के लोहिया,
उषा, जय ने पुकारा है।
गुलामी की कड़ी तोड़ो,
तड़ातड़ हथकड़ी तोड़ो।
लगा कर होड़ आंधी से,
जमीं से आसमां जोड़ो।
शिवा की आन पर गरजो,
कुँवर बलिदान पर गरजो,
बढ़ो जय हिन्द नारे से,
कलेजा थरथरा दें हम।
किले पर तीन रंगों का,
फरहरा फरफरा दें हम।
– श्यामनारायण पांडे।

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कविता / जंगल गाथा /

एक नन्हा मेमना

और उसकी माँ बकरी,

जा रहे थे जंगल में

……राह थी संकरी।

अचानक सामने से आ गया एक शेर,

लेकिन अब तो

हो चुकी थी बहुत देर।

भागने का नहीं था कोई भी रास्ता,

बकरी और मेमने की हालत खस्ता।

उधर शेर के कदम धरती नापें,

इधर ये दोनों थर-थर कापें।

अब तो शेर आ गया एकदम सामने,

बकरी लगी जैसे-जैसे

बच्चे को थामने।

छिटककर बोला बकरी का बच्चा-

शेर अंकल!

क्या तुम हमें खा जाओगे

एकदम कच्चा?

शेर मुस्कुराया,

उसने अपना भारी पंजा

मेमने के सिर पर फिराया।

बोला-

हे बकरी – कुल गौरव,

आयुष्मान भव!

दीर्घायु भव!

चिरायु भव!

कर कलरव!

हो उत्सव!

साबुत रहें तेरे सब अवयव।

आशीष देता ये पशु-पुंगव-शेर,

कि अब नहीं होगा कोई अंधेरा

उछलो, कूदो, नाचो

और जियो हँसते-हँसते

अच्छा बकरी मैया नमस्ते!

इतना कहकर शेर कर गया प्रस्थान,

बकरी हैरान-

बेटा ताज्जुब है,

भला ये शेर किसी पर

रहम खानेवाला है,

लगता है जंगल में

चुनाव आनेवाला है।

-अशोक चक्रधर

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मुनादी / धर्मवीर भारती

खलक खुदा का, मुलुक बाश्शा का

हुकुम शहर कोतवाल का

हर खासो-आम को आगह किया जाता है

कि खबरदार रहें

और अपने-अपने किवाड़ों को अन्दर से

कुंडी चढा़कर बन्द कर लें

गिरा लें खिड़कियों के परदे

और बच्चों को बाहर सड़क पर न भेजें

क्योंकि

एक बहत्तर बरस का बूढ़ा आदमी अपनी काँपती कमजोर आवाज में

सड़कों पर सच बोलता हुआ निकल पड़ा है

शहर का हर बशर वाकिफ है

कि पच्चीस साल से मुजिर है यह

कि हालात को हालात की तरह बयान किया जाए

कि चोर को चोर और हत्यारे को हत्यारा कहा जाए

कि मार खाते भले आदमी को

और असमत लुटती औरत को

और भूख से पेट दबाये ढाँचे को

और जीप के नीचे कुचलते बच्चे को

बचाने की बेअदबी की जाये

जीप अगर बाश्शा की है तो

उसे बच्चे के पेट पर से गुजरने का हक क्यों नहीं ?

आखिर सड़क भी तो बाश्शा ने बनवायी है !

बुड्ढे के पीछे दौड़ पड़ने वाले

अहसान फरामोशों ! क्या तुम भूल गये कि बाश्शा ने

एक खूबसूरत माहौल दिया है जहाँ

भूख से ही सही, दिन में तुम्हें तारे नजर आते हैं

और फुटपाथों पर फरिश्तों के पंख रात भर

तुम पर छाँह किये रहते हैं

और हूरें हर लैम्पपोस्ट के नीचे खड़ी

मोटर वालों की ओर लपकती हैं

कि जन्नत तारी हो गयी है जमीं पर;

तुम्हें इस बुड्ढे के पीछे दौड़कर

भला और क्या हासिल होने वाला है ?

आखिर क्या दुश्मनी है तुम्हारी उन लोगों से

जो भलेमानुसों की तरह अपनी कुरसी पर चुपचाप

बैठे-बैठे मुल्क की भलाई के लिए

रात-रात जागते हैं;

और गाँव की नाली की मरम्मत के लिए

मास्को, न्यूयार्क, टोकियो, लन्दन की खाक

छानते फकीरों की तरह भटकते रहते हैं…

तोड़ दिये जाएँगे पैर

और फोड़ दी जाएँगी आँखें

अगर तुमने अपने पाँव चल कर

महल-सरा की चहारदीवारी फलाँग कर

अन्दर झाँकने की कोशिश की

क्या तुमने नहीं देखी वह लाठी

जिससे हमारे एक कद्दावर जवान ने इस निहत्थे

काँपते बुड्ढे को ढेर कर दिया ?

वह लाठी हमने समय मंजूषा के साथ

गहराइयों में गाड़ दी है

कि आने वाली नस्लें उसे देखें और

हमारी जवाँमर्दी की दाद दें

अब पूछो कहाँ है वह सच जो

इस बुड्ढे ने सड़कों पर बकना शुरू किया था ?

हमने अपने रेडियो के स्वर ऊँचे करा दिये हैं

और कहा है कि जोर-जोर से फिल्मी गीत बजायें

ताकि थिरकती धुनों की दिलकश बलन्दी में

इस बुड्ढे की बकवास दब जाए

नासमझ बच्चों ने पटक दिये पोथियाँ और बस्ते

फेंक दी है खड़िया और स्लेट

इस नामाकूल जादूगर के पीछे चूहों की तरह

फदर-फदर भागते चले आ रहे हैं

और जिसका बच्चा परसों मारा गया

वह औरत आँचल परचम की तरह लहराती हुई

सड़क पर निकल आयी है।

ख़बरदार यह सारा मुल्क तुम्हारा है

पर जहाँ हो वहीं रहो

यह बगावत नहीं बर्दाश्त की जाएगी कि

तुम फासले तय करो और

मंजिल तक पहुँचो

इस बार रेलों के चक्के हम खुद जाम कर देंगे

नावें मँझधार में रोक दी जाएँगी

बैलगाड़ियाँ सड़क-किनारे नीमतले खड़ी कर दी जाएँगी

ट्रकों को नुक्कड़ से लौटा दिया जाएगा

सब अपनी-अपनी जगह ठप

क्योंकि याद रखो कि मुल्क को आगे बढ़ना है

और उसके लिए जरूरी है कि जो जहाँ है

वहीं ठप कर दिया जाए

बेताब मत हो

तुम्हें जलसा-जुलूस, हल्ला-गूल्ला, भीड़-भड़क्के का शौक है

बाश्शा को हमदर्दी है अपनी रियाया से

तुम्हारे इस शौक को पूरा करने के लिए

बाश्शा के खास हुक्म से

उसका अपना दरबार जुलूस की शक्ल में निकलेगा

दर्शन करो !

वही रेलगाड़ियाँ तुम्हें मुफ्त लाद कर लाएँगी

बैलगाड़ी वालों को दोहरी बख्शीश मिलेगी

ट्रकों को झण्डियों से सजाया जाएगा

नुक्कड़ नुक्कड़ पर प्याऊ बैठाया जाएगा

और जो पानी माँगेगा उसे इत्र-बसा शर्बत पेश किया जाएगा

लाखों की तादाद में शामिल हो उस जुलूस में

और सड़क पर पैर घिसते हुए चलो

ताकि वह खून जो इस बुड्ढे की वजह से

बहा, वह पुँछ जाए

बाश्शा सलामत को खूनखराबा पसन्द नहीं

— धर्मवीर भारती.

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सुधेन्दु पटेल की कविता : मुझे माफ़ न करना

[ जयपुर के नगीना उद्योग के बाल – श्रमिकों से … वरिष्ट पत्रकार सुधेन्धु पटेल ]

मेरे बच्चों

मुझे माफ़ न करना !

 

कि किलकारियों को भूख की नोक पर

उछाल – उछालकर

सिसकारियों में बदला है मैंने ही ।

 

कि नाजुक उंगलियों के पोरों पर

आखरों के फूल नहीं ,

उगाये हैं तेजाबी फफोले मैंने ही ।

 

कि कोपल – से उगते सपनों पर

चिंदी – चिंदी आग

स्पर्श की जगह छितराये मैंने ही ।

 

ना बच्चों

माफ़ नकरना हमें

जब तक तुम्हा्री

पारदर्शी आंखों के सामने

प्रायश्चित न कर लूँ मैं ।

– सुधेन्दु पटेल

ई-पता patelsudhendu@gmail.com

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कविता / होमवर्क / श्यामबहादुर ‘नम्र’

होमवर्क

एक बच्ची स्कूल नहीं जाती, बकरी चराती है।
वह लकड़ियाँ बटोरकर घर लाती है,
फिर माँ के साथ भात पकाती है।

एक बच्ची किताब का बोझ लादे स्कूल जाती है,
शाम को थकी मांदी घर आती है।
वह स्कूल से मिला होमवर्क, माँ-बाप से करवाती है।

बोझ किताब का हो या लकड़ी का दोनों बच्चियाँ ढोती हैं,
लेकिन लकड़ी से चूल्हा जलेगा, तब पेट भरेगा,
लकड़ी लाने वाली बच्ची, यह जानती है।
वह लकड़ी की उपयोगिता पहचानती है।
किताब की बातें, कब, किस काम आती हैं?
स्कूल जाने वाली बच्ची बिना समझे रट जाती है।

लकड़ी बटोरना, बकरी चराना और माँ के साथ भात पकाना,
जो सचमुच गृह कार्य हैं, होमवर्क नहीं कहे जाते हैं।
लेकिन स्कूल से मिले पाठों के अभ्यास,
भले ही घरेलू काम न हों, होमवर्क कहलाते हैं।

ऐसा कब होगा,
जब किताबें सचमुच के ‘होमवर्क’ (गृहकार्य) से जुड़ेंगी,
और लकड़ी बटोरने वाली बच्चियाँ भी ऐसी किताबें पढ़ेंगी?

– श्यामबहादुर ‘नम्र’

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अल्लामा इकबाल : बच्चों के लिए (५) : शहद की मक्खी

इस फूल पे बैठी , कभी उस फूल पे बैठी

बतलाओ तो, क्या ढूँढ़ती है शहद की मक्खी ?

क्यों आती है , क्या काम है गुलजार में उसका ?

ये बात जो समझाओ तो समझें तुम्हे दाना

चहकारते फिरते हैं जो गुलशन में परिन्दे

क्या शहद की मक्खी की मुलाकात है उनसे ?

आशिक है ये कुमरी की , कि बुलबुल की है शैदा ?

या खींच के लाता है इसे सैर का चसका ?

दिल बाग़ की कलियों से तो अटका नहीं इसका ?

भाता है इसे उनके चटखने का तमाशा ?

सबज़े से है कुछ काम कि मतलब है सबा से ?

या प्यार है गुलशन के परिन्दों की सदा से ?

भाता है इसे फूल पे बुलबुल का चहकना ?

या सरो पे बैठे हुए कुमरी का ये गाना ?

पैग़ाम कोई लाती है बुलबुल ज़बानी ?

या कहती है ये फूल के कानों में कहानी ?

क्यों बाग में आती है , ये बतलाओ तो जानें ?

क्या कहने को आती है , ये समझाओ तो जानें ?

बेवजह तो आख़िर कोई आना नहीं इसका

होशियार है मक्खी इसे गाफ़िल न समझना

बेसूद नहीं , बाग़ में इस शौक से उड़ना

कुछ खेल में ये वक़्त गँवाती नहीं अपना

करती नहीं कुछ काम अगर अक़्ल तुम्हारी

हम तुमको बताते हैं , सुनो बात हमारी

कहते हैं जिसे शहद , वह एक तरह का रस है

आवारा इसी चीज़ की ख़ातिर ये मगस है

रखा है ख़ुदा ने उसे फूलों में छुपाकर

मक्खी उसे ले जाती है छत्ते में उड़ाकर

हर फूल से ये चूसती फिरती है उसी को

ये काम  बड़ा है , इसे बेसूद न जानो

मक्खी ये नहीं है, कोई नेमत है ख़ुदा की

मिलता न हमें शहद , ये मक्खी जो न होती

इस शहद को फूलों से उड़ाती है ये मक्खी

इनसान की ये चीज़ ग़िज़ा भी है , दवा भी

कुव्वत है अगर इसमें तो है इसमें शिफ़ा भी

रखते हो अगर होश तो इस बात को समझो

तुम शहद की मक्खी की तरह इल्म को ढूँढ़ो

ये इल्म भी एक शहद है और शहद भी ऐसा

दुनिया में नहीं शहद कोई इससे मुसफ़्फ़ा

हर शहद से जो शहद है मीठा , वो यही है

करता है जो इनसान को दाना , वो यही है

ये अक़्ल के आईने को देता है सफ़ाई

ये शहद है इनसाँ की , वो मक्खी की कमाई

सच समझो तो इनसान की अजमता है इसी से

इस ख़ाक के पुतले को सँवारा है इसी ने

फूलों की तरह अपनी किताबों को समझना

चसका हो अगर तुमको भी कुछ इल्म के रस का

– अल्लामा इकबाल

[ गुलज़ार = गुलशन ; फुलवारी , दाना = अक़्लमंद ;होशियार , कुमरी= एक चिड़िया, शैदा = आशिक , सबा = सुबह की हवा ,सदा= अवाज़ , सरो = एक सीधा छतनार पेड़ ; वनझाऊ , बेसूद = बेफ़ायदा ; बेमक़सद , मगस = मक्खी;शहद की मक्खी ,शिफ़ा= तन्दुरस्ती ; रोग से मुक्ति, मुसफ़्फ़ा = साफ़ – सुथरा ; स्वच्छ , अजमता = बड़ाई ;महानता ]

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अल्लामा इकबाल : बच्चों के लिए (३) : हमदर्दी

टहनी पे किसी शजर* की तनहा
बुलबुल था कोई उदास बैठा
 
कहता था की रात सर पे आई
उड़ने चुगने में दिन गुज़ारा
 
पहुँचूँ किसी तरह आशियाँ* तक
हर चीज़ पे छा गया अन्धेरा
 
सुनकर बुलबुल की आहो ज़ारी*
जुगनू कोई पास ही से बोला
 
हाज़िर हूँ मदद को जानो-दिल से
कीड़ा हूँ अगरचे मैं ज़रा-सा
 
क्या गम है जो रात है अंधेरी
मैं राह में रौशनी करूंगा
 
अलाह ने दी है मुझको मशआल
चमका के मुझे दिया बनाया
 
हैं लोग वही जहां में अच्छे
आते हैं जो काम दूसरों के
 
– अल्लामा इकबाल
 
[ शजर = पेड़ , आशियाँ = घोंसला , आहो ज़ारी = रोना-चिल्लाना ]

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अरविन्द चतुर्वेद का स्वागत करें

हिन्दी के वरिष्ट पत्रकार और कवि अरविन्द चतुर्वेद ने अपना चिट्ठा बनाया है , जनपद । अपने लम्बे साहित्यिक जीवन से चुनी हुई ढेर सारी कविताओं को उन्होंने एक ही दिन में दनादन अलग – अलग पोस्ट के रूप में प्रकाशित कर दिया है । आप सबसे निवेदन है कि अरविन्द के चिट्ठे पर जाएँ और उनकी सभी प्रकाशित बेहतरीन कविताओं – दोहों को पढ़ें । अपनी राय व्यक्त करें । ऐसे वरिष्ट साहित्यिकजन के द्वारा चिट्ठेकारी शुरु करना हिन्दी के लिए महत्वपूर्ण है । आइए , उनका स्वागत करें ।

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काले बादल : केरल की मीनाक्षी पय्याडा की कविता

[ मीनाक्षी पय्याडा के माता – पिता दोनों शुद्ध मलयाली हैं , यानी केरलवासी । उसकी माँ , केरल के कन्नूर जिले में केन्द्रीय विद्यालय में शिक्षिका है इसलिए मीनाक्षी को अपने स्कूल ( केन्द्रीय विद्यालय) में हिन्दी पढ़ने का मौका मिला। मीनाक्षी को अब तक किसी हिन्दी भाषी राज्य की यात्रा का मौका नहीं मिला है । हमारे दल , समाजवादी जनपरिषद के हाल ही में धनबाद में हुए राष्ट्रीय सम्मेलन में मीनाक्षी के पिता हिन्दी में लिखी उसकी यह प्यारी सी कविता साथ लाये थे ।  – अफ़लातून ]

kale badal

काले बादल

काले बादल

आओ बादल , काले बादल

बारिश हो कर आओ बादल

सरिता और सागर को भरो पानी से ।

मैं संकल्प करती हूँ

तुम्हारे साथ खेलने का ,

पर तुम आए तो नहीं ?

आओ बादल , तुम आसमान में घूमते फिरते

पर मेरे पास क्यों नहीं आते ?

तुम यहाँ आ कर देखो

कि ये बूँदें कितनी सुन्दर हैं ।

क्या मजा है आसमान में

तुम भी मन में करो विचार ।

आओ बादल , काले बादल ।

– मीनाक्षी पय्याडा ,

उम्र – १० वर्ष , कक्षा ५,

केन्द्रीय विद्यालय ,

’ चन्द्रकान्तम’ ,

पोस्ट- चोव्वा ,

जि. कन्नूर – ६

केरलम

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