हमें नहीं चाहिए शिक्षा का ऐसा अधिकार / श्यामबहादुर ’ नम्र ’

हमे नहीं चाहिए शिक्षा का ऐसा अधिकार,
जो गैर-जरूरी बातें जबरन सिखाये ।
हमारी जरूरतों के अनुसार सीखने पर पाबन्दी लगाये,
हमें नहीं चाहिए ऐसा स्कूल
जहाँ जाकर जीवन के हुनर जाँए भूल।
हमें नहीं चाहिए ऐसी किताब
जिसमें न मिलें हमारे सवालों के जवाब
हम क्यों पढ़ें वह गणित,
जो न कर सके जिन्दगी का सही-सही हिसाब।
क्यों पढ़ें पर्यावरण के ऐसे पाठ
जो आँगन के सूखते वृक्ष का इलाज न बताये॥
गाँव में फैले मलेरिया को न रोक पायें
क्यों पढ़ें ऐसा विज्ञान,
जो शान्त न कर सके हमारी जिज्ञासा ।
जीवन  में जो समझ में न आये,
क्यों पढ़ें वह भाषा ।
हम क्यों पढे़ वह इतिहास जो धार्मिक उन्माद बढ़ाए
नफ़रत का बीज बोकर,
आपसी भाई-चारा घटाये।
हम क्यों पढ़ें ऐसी पढ़ाई जो कब कैसे काम आएगी,
न जाए बताई ।
परीक्षा के बाद, न रहे याद,
हुनर से काट कर जवानी कर दे बरबाद ।
हमे चाहिए शिक्षा का अधिकार,
हमे चाहिए सीखने के अवसर
हमे चाहिए किताबें ,
हमें चाहिए स्कूल।
लेकिन जो हमें चाहिए हमसे पूछ कर दीजिए।
उनसे पूछ कर नहीं जो हमें कच्चा माल समझते हैं ।
स्कूल की मशीन में ठोक-पीटकर
व्यवस्था के पुर्जे में बदलते हैं,
हमें नहीं चाहिए शिक्षा का ऐसा अधिकार जो
गैर जरूरी बातें जबरन सिखाये
हमारी जरूरतों के अनुसार सीखने पर पाबन्दी लगाये ।
-श्याम बहादुर ’ नम्र ’

कवि के स्वर में कविता का पाठ सुनें इस पर खटका मार कर ।

4 टिप्पणियाँ

Filed under शिक्षा education, hindi poems

4 responses to “हमें नहीं चाहिए शिक्षा का ऐसा अधिकार / श्यामबहादुर ’ नम्र ’

  1. Kavi ko sadhuwaad. Surjeet Patar ki yeh kavita yaad aagayee

    Bhare bhare baste
    Lame lame raste (lame=lambe)
    Thakk gaye ne gode (gode= ghutane)
    Dukhan lag paye modhe (modhe=kandhe)
    Aina bhar chukaya ae (aina=itna; chukya ae= utha rakha hai)
    Asin koi khote aan? (asin=hum; aan=hein)

    Teacher jee aange
    Aake hukam sunaonge (sunaonge=sunayenge)
    Chalo kitaban kholo
    Picche picche bolo
    Picche picche boliye
    Asin koi tote aan?

    Chalo chalo jee chaliye
    Jake seatan maliye (seatan= seats; maliye=occupy)
    Jekar ho gayee der (jekar=agar)
    Ki hovega pher (pher=phir)
    Teacher jee aange
    Jhirkan khub sunaonge (jhirkan= jhidken)
    Asin koi khalote aan? (khalote=khade, standing)

    English tarzume ke lye dekhein http://parchanve.wordpress.com/
    Ture hi tan jane aan (ture= chale hi to aa rahe hein)

  2. मैथिली गुप्त

    बहुत अच्छी लगी यह कविता.
    मुझे भी स्कूल कालेज में पढाये जाने वाली, कच्चा माल समझने वाली शिक्षा पद्धति से सख्त आपत्ति थी.
    इसीलिये मैंने तो अपने बच्चों को इस विद्यालय और महाविद्यालय की पढाई से दूर ही रखना आवश्यक समझा.

  3. दूसरे पहलू को सामने रखती रचना…
    व्यवस्था के पुर्जे ही आज की शिक्षा प्रणाली में ढ़ाले जा रहे हैं…

  4. पिंगबैक: इस चिट्ठे की टोप पोस्ट्स ( गत चार वर्षों में ) « शैशव

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