Daily Archives: अक्टूबर 18, 2009

गुणाकर मुले नहीं रहे

[ गुणाकर मुले १३ अक्टूबर को गुजर गये । बचपन से हम सब ने जिन्हें हिन्दी के प्रमुख विज्ञान लेख के तौर पर पढ़ा है उनकी मृत्यु की खबर सूचना क्रान्ति के तहत शायद इतनी बड़ी खबर नहीं बनती कि उनके सभी प्रशंसक जान पायें । एक तकनीकी संस्थान में हिन्दी अधिकारी जिन्होंने गुणाकर जी को अपने संस्थान में व्याख्यान हेतु आमन्त्रित किया था – प्रियंकर पालीवाल को इस बात का सदमा पहुंचा कि उन्हें यह खबर जानने में विलम्ब हुआ । सैटेलाईट खबरिया चैनेलों के लिए यह खबर नहीं बनती होगी। हिन्दी चिट्ठों में विज्ञान लेखन के सुव्यवस्थित समूह है । हमें आशा करते हैं कि इस महत्वपूर्ण हिन्दी सेवी पर शीघ्र ही हमें विस्तृत आलेख पढ़ने को मिलेगा । यहाँ मैं एजेन्सी द्वारा जारी संक्षिप्त खबर को दे रहा हूँ । ]

नई दिल्ली। हिन्दी और अंग्रेजी में विज्ञान लेखन को लोकप्रिय बनाने वाले गुणाकर मुले का शुक्रवार को निधन हो गया। वह 74 वर्ष के थे। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार मुले पिछले डेढ-दो वर्षो से बीमार थे। उन्हें मांसपेशियों की एक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी हो गई थी जिससे उनका चलना-फिरना बंद हो गया था। उन्होंने दोपहर 1.30 बजे अंतिम सासें ली।
महाराष्ट्र के अमरावती जिले के सिंधू बुर्जूग गांव में जन्मे गुणाकर मुले मराठी भाषी थे, पर उन्होंने पचास साल से अधिक समय तक हिन्दी में विज्ञान लेखन किया। उनकी करीब 35 पुस्तकें छपीं। उनके परिवार में पत्नी, दो बेटियां एवं एक बेटा है।
मुले ने हिन्दी में करीब तीन हजार लेख लिखे, जबकि अंग्रेजी में उन्होंने 250 सौ से अधिक लेख लिखे।
उन्हें हिन्दी अकादमी का साहित्यकार सम्मान, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान का आत्माराम पुरस्कार, बिहार का कर्पूरी ठाकुर स्मृति सम्मान मिल चुका है।

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