आरक्षित सफ़र और असुरक्षित संस्थान

दक्षिण में दोनों प्रकार के आरक्षण के प्रति चेतना अधिक है । नौकरियों में अधिक पहले से आरक्षण होने के कारण दोनों प्रकारों के आरक्षण के प्रति परिपक्वता भी लाजमी तौर पर वहाँ अधिक है । आरक्षण के दो प्रकारों से मेरा आशय नौकरियों तथा रेल के आरक्षण से है । उत्तर में आम तौर पर रेल के आरक्षण के पक्षधरों के गले नौकरियों में आरक्षण नहीं उतरता था । बनारस – पटना से चेन्नै – बंगलुरु – हैदराबाद जाने वाली गाड़ियों में  दो महीने पहले कराये गये आरक्षण में आप प्रतिक्षा सूची में पहले – दूसरे नम्बर पर ही क्यों न रहे हों , गाड़ी छूटने के वक्त तक यथास्थिति के बरकरार रहने की संभावना ही ज्यादा रहती है । इस परिस्थितिवश हैदराबाद से शुरु होने वाली यात्रा को दो दिन टालना पड़ा तथा भारतीय अभियांत्रिकी सेवा में फँसे एक प्रिय मित्र की मदद लेनी पड़ी ।

हैदराबाद स्थित इन्टर्नैशनल इन्स्टीट्यूट ऑफ़ इनफ़ॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी में बायो इन्फ़ॉर्मैटिक्स में शोध के लिए मेरी पत्नी डॉ . स्वाति को पाँच महीने रहना है । कभी जिला मुख्यालय बनाने के लिए चुनी गयी इस जगह पर कुछ सरकारी भवन बन भी चुके थे परन्तु खुद को सूबे का मख्य मन्त्री के बजाए सूबे का सी.ई.ओ. कहलाना पसंद करने वाले चन्द्राबाबू नायड़ू ने इसे निजी क्षेत्र के इस उच्च शिक्षण शोध संस्थान को बनाने के लिए सौंप दिया था । इस संस्थान के परिसर के एक बड़े हिस्से में एक डीनॉसॉर-सी लम्बी – चौड़ी इमारत का कंकाल खड़ा था । सत्यम इन्फ़ो के मालिकान जब से जेल प्रवास में हैं तब से निर्माण कार्य बन्द है ! उनके चन्दे से इसे बनना था ।

बहरहाल , कानपुर आई.आई.टी. के ’मजदूर-किसान-नीति” से जुड़े जो युवा बाद में ’पीपल्स पैट्रियॉटिक साइंस  एण्ड टेक्नॉलॉजी’ तथा ’लोक-विद्या” से जुड़े , उनमें से एक प्रमुख वैज्ञानिक – प्रोफ़ेसर अभिजीत मित्रा और कवि-चिट्ठेकार प्रोफ़ेसर हरजिन्दर सिंह उर्फ़ लाल्टू इसी संस्थान में सेवारत-शोधरत हैं। विदेशों से पीएच.डी के बाद भारत लौटने की इच्छा रखने वाले कई युवा इस संस्थान में बतौर शिक्षक जुड़े हैं – संस्थान की यह एक सकारात्मक उपलब्धि है ।

हैदराबाद के संगीत प्रेमी चिट्ठेकार सागर नाहर से मुझे मिलना था । उस बाबत अपने गीतों वाले चिट्ठे ’आगाज़’ पर लिखना उचित रहेगा ।

चलते वक्त लाल्टू की कहानियों का संग्रह ’घुघनी’ और उनकी सुन्दर लिखावट में १४ कवितायें पाईं ।

6 टिप्पणियाँ

Filed under safarnama

6 responses to “आरक्षित सफ़र और असुरक्षित संस्थान

  1. आप की हैदराबाद यात्रा से बहुत कुछ जानकारियाँ मिलीं हैदराबाद के बारे में।

  2. मै तो कल की लाल्टू जी की कविता पढने ही आया था .आपने आज नयी पोस्ट डाली…

  3. पिंगबैक: सफरनामा ३ : हैदराबाद – पुणे « शैशव

  4. पिंगबैक: इस चिट्ठे की टॉप पोस्ट्स ( गत चार वर्षों में ) « शैशव

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s