Monthly Archives: अगस्त 2008

ईसाई और मुसलमान क्यों बनते हैं ? – स्वामी विवेकानन्द

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अगर हमारे देश में कोई नीच जाति में जन्म लेता है , तो वह हमेशा के लिए गया – बीता समझा जाता है , उसके लिए कोई आशा – भरोसा नहीं । ( पत्रावली भाग २ , पृ. ३१६ ) आइए , देखिए तो सही , त्रिवांकुर में जहाँ पुरोहितों के अत्याचार भारतवर्ष में सब से अधिक हैं , जहाँ एक एक अंगुल जमीन के मालिक ब्राह्मण हैं,वहाँ लगभग चौथाई जनसंख्या ईसाई हो गयी है ! ( पत्रावली भाग १ , पृ. ३८५ ) यह देखो न – हिंदुओं की सहानुभूति न पाकर मद्रास प्रांत में हजारों पेरिया ईसाई बने जा रहे हैं , पर ऐसा न समझना कि वे केवल पेट के लिए ईसाई बनते हैं । असल में हमारी सहानुभूति न पाने के कारण वे ईसाई बनते हैं । ( पत्रावली भाग ६ , पृ. २१५ तथा नया भारत गढ़ो पृ. १८)

    भारत के गरीबों में इतने मुसलमान क्यों हैं ? यह सब मिथ्या बकवाद है कि तलवार की धार पर उन्होंने धर्म बदला । जमींदारों और पुरोहितों से अपना पिंड छुड़ाने के लिए ही उन्होंने ऐसा किया , और फलत: आप देखेंगे कि बंगाल में जहाँ जमींदार अधिक हैं , वहाँ हिंदुओं से अधिक मुसलमान किसान हैं । ( पत्रावली भाग ३ , पृ. ३३०, नया भारत गढ़ो, पृ . १८ )

    हमने राष्ट्र की हैसियत से अपना व्यक्तिभाव खो दिया है और यही सारी खराबी का कारण है । हमे राष्ट्र में उसके खोये हुए व्यक्तिभाव को वापस लाना है और जनसमुदाय को उठाना है। ( पत्रावली भाग २ , पृ. ३३८ ) भारत को उठाना होगा , गरीबों को भोजन देना होगा , शिक्षा का विस्तार करना होगा और पुरोहित – प्रपंच की बुराइयों का निराकरण करना होगा । सब के लिए अधिक अन्न और सबको अधिकाधिक सुविधाएँ मिलती रहें । ( पत्रावली भाग ३ , पृ ३३४ )

    पहले कूर्म अवतार की पूजा करनी चाहिए । पेट है वह कूर्म । इसे पहले ठंडा किये बिना धर्म-कर्म की बात कोई ग्रहण नहीं करेगा । देखते नहीं , पेट की चिन्ता से भारत बेचैन है।धर्म की बात सुनाना हो तो पहले इस देश के लोगों के पेट की चिंता दूर करना होगा । नहीं तो केवल व्याख्यान देने से विशेष लाभ न होगा । (पत्रावली भाग ६ , पृ १२८ ) पहले  रोटी और तब धर्म चाहिए । गरीब बेचारे भूखों मर रहे हैं , और हम उन्हें आवश्यकता से अधिक धर्मोपदेश दे रहे हैं ! ( पत्रावली भाग ५ , पृ. ३२२ )

लोगों को यदि आत्मनिर्भर बनने की शिक्षा न दी जाय तो सारे संसार की दौलत से भी भारत के एक छोटे से गाँव की सहायता नहीं की जा सकती है । ( पत्रावली भाग ६ , पृ ३५० )

    लोग यह भी कहते थे कि अगर साधारण जनता में शिक्षा का प्रसार होगा , तो दुनिया का नाश हो जायगा । विशेषकर भारत में , हमें समस्त देश में ऐसे सठियाये बूढे मिलते हैं , जो सब कुछ साधारण जनता से गुप्त रखना चाहते हैं । इसी कल्पना में अपना बड़ा समाधान कर लेते हैं कि वे सारे विश्व में सर्वश्रेष्ठ हैं । तो क्या वे समाज की भलाई के लिए ऐसा कहते हैं अथवा स्वार्थ से अंधे हो कर ? मुट्ठी भर अमीरों के विलास के लिए लाखों स्त्री-पुरुष अज्ञता के अंधकार और अभाव के नरक में पड़े रहें ! क्योंकि उन्हें धन मिलने पर या उनके विद्या सीखने पर समाज डाँवाडोल हो जायगा ! समाज है कौन ? वे लोग जिनकी संख्या लाखों है ? या आप और मुझ जैसे दस – पाँच उच्च श्रेणी वाले !! ( नया भारत गढ़ो , पृ. ३१ )

    यदि स्वभाव में समता न भी हो , तो भी सब को समान सुविधा मिलनी चाहिए । फिर यदि किसी को अधिक तथा किसी को अधिक सुविधा देनी हो , तो बलवान की अपेक्षा दुर्बल को अधिक सुविधा प्रदान करना आवश्यक है । अर्थात चांडाल के लिए शिक्षा की जितनी आवश्यकता है , उतनी ब्राह्मण के लिए नहीं । ( नया भारत गढ़ो , पृ . ३८ )

    जब तक करोड़ों भूखे और अशिक्षित रहेंगे , तब तक मैं प्रत्येक उस आदमी को विश्वासघातक समझूँगा , जो उनके खर्च पर शिक्षित हुआ है , परंतु जो उन पर तनिक भी ध्यान नहीं देता ! वे लोग जिन्होंने गरीबों को कुचलकर धन पैदा किया है और अब ठाठ-बाट से अकड़कर चलते हैं, यदि उन बीस करोड़ देशवासियों के लिए जो इस समय भूखे और असभ्य बने हुए हैं , कुछ नहीं करते , तो वे घृणा के पात्र हैं । ( नया भारत गढ़ो , पृ. ४४ – ४५ )

    एक ऐसा समय आयेगा जब शूद्रत्वसहित शूद्रों का प्राधान्य होगा , अर्थात आजकल जिस प्रकार शूद्र जाति वैश्य्त्व अथवा क्षत्रियत्व लाभ कर अपना बल दिखा रही है , उस प्रकार नहीं , वरन अपने शूद्रोचित धर्मकर्मसहित वह समाज में आधिपत्य प्राप्त करेगी । पाश्चात्य जगत में इसकी लालिमा भी आकाश में दीखने लगी है , और इसका फलाफल विचार कर सब लोग घबराये हुए हैं। ‘सोशलिज्म’ , ‘अनार्किज्म’,’नाइहिलिज्म’ आदि संप्रदाय इस विप्लव की आगे चलनेवाली ध्वजाएँ हैं । ( पत्रावली भाग ८ , पृ. २१९-२०, नया भारत गढ़ो पृ. ५६ )

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कविता / तीसरा आदमी / राजेन्द्र राजन

मैदान में जैसे ही पहला पहलवान आया

उसकी जयकार शुरु हो गई

उसी जयकारे को चीरता हुआ दूसरा पहलवान आया

और दोनों परिदृश्य पर छा गए

पहले दोनों ने धींगामुश्ती की कुछ देर

कुछ देर बाद दोनों ने कुछ तय किया

फिर पकड़ लाए वे उस आदमी को जो खेतों की तरफ़ जा रहा था

दोनों ने झुका दिया उसे आगे की ओर

अब वह हो गया था उन दोनों के बीच एक चौपाए की तरह

तब से उस आदमी की पीठ पर कुहनियां गड़ा कर

वे पंजा लड़ा रहे हैं

परिदृश्य के एक कोने से

कभी-कभी आती है एक कमज़ोर-सी आवाज़

कि उस तीसरे आदमी को बचाया जाए

मगर इस पर जो प्रतिक्रियाएं होती हैं

उनसे पता चलता है कि सबसे मुखर लोग

दोनों बाहुबलियों के प्रशंसक

या समर्थक गुटों में बदल गए हैं

– राजेन्द्र राजन

 

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भारतीय ‘जागृति’ बनाम पाकिस्तानी ‘बेदारी’ का राष्ट्र-प्रेम

पाक जागृति

पाक जागृति



‘हम लाये हैं तूफ़ान से कश्ती निकाल के , इस मुल्क़ को रखना मेरे बच्चों को संभाल कर’ ऊपर का विडियो १९५७ में बनी पाकिस्तानी फिल्म बेदारी का है।  नीचे का गीत आप सब ने १५ अगस्त , २६ जनवरी , २ अक्टूबर अथवा ३० जनवरी को विविध भारती पर सुना होगा। बेदारी में इसके अलावा जागृति से प्रेरित अन्य गीत भी हैं । दोनों फिल्मों की कहानी भी समान थी ।

बहरहाल , यूट्यूब पर पाकिस्तानी और भारतीय देश-प्रेम सैंकड़ों टिप्पणियों की शक्ल में देखा जा सकता है । मजेदार बात यह है कि दोनों ओर से नथूने फुलाने वाले ही नहीं कुछ समझदार लोग भी मिल जाते हैं । जैसे एक भारतीय पाठक कहता है ,’२१वीं सदी में ऐसे गीतों में उन १० फ़ीसदी लोगों के तबके का भी हवाला होना चाहिए जो भारत और पाकिस्तान दोनों पर शासन करता है ।’ यही पाठक कहता है ,’हम जागृति फिल्म के कवि प्रदीप के इन्हीं गीतों को सुनकर बड़े हुए हैं लेकिन सैटेलाइट टेलीविजन चैनल आने के बाद इन्हें सुनने के लिए यूट्यूब के सहारे हैं ।’ दोनों तरफ़ के गीतों को सुनने के बाद ,’चलिए हम सगे भाइयों की तरह रहें’ और ‘काश भारत-पाक विभाजन न हुआ होता’ जैसे उद्गार भी व्यक्त हुए। लाजमी तौर पर बहस में बाँग्लादेश और काश्मीर का हवाला भी आता है । बाँग्लादेश की मुक्ति संग्राम का हवाला देते वक्त यह भी याद दिला दिया जाता है कि मुस्लिम लीग का गठन ढाका में हुआ था । एक साँस में भारत और पाकिस्तान दोनों का जिन्दाबाद लगाने वाले भी मिलते हैं । पाकिस्तान में इस गीत पर एक नया विडियो बना है जिसमें तिरंगा जलाते हुए दिखाया गया है , यह समझदार पाकिस्तानियों के भी गले नहीं उतरता।’परस्पर घृणा रोको और हूनर की इज़्ज़त करो’ कहने वाले भी हैं और इन गीतों में पाकिस्तानी गीत बाद में आए यह साबित हो जाने के बाद यह बताना न चूकने वाले भी हैं कि ‘पहले tum hi ho mahboob mere masood rana खोजें (१९६६ का पाकिस्तानी गीत आ जाएगा),फिर tum hi ho mehboob mere shahrukh khan खोजने पर १९९० भारतीय गीत आ जाएगा ।
धर्माधारित राष्ट्र (हिन्दू अथवा इस्लामिक) अथवा दो धर्म- दो राष्ट्र का परिणाम सांस्कृतिक औपनिवेशिक शोषण से मुक्त हुआ बाँग्लादेश है ।
बहरहाल जागृति की कहानी सुन लें । १९५४ में सत्येन बोस निर्देशित जागृति में पण्डित कवि प्रदीप के गीत हैं और हेमन्त कुमार का संगीत है। मुख्य अभिनेता अभि भट्टाचार्य , राजकुमार गुप्ता , रतन कुमार , प्रणति घोष , बिपिन गुप्ता , मुमताज़ बेग़म हैं। गीत मोहम्मद रफ़ी , आशा भोंसले और कवि प्रदीप ने गाये हैं । कहानी एक बरबाद ,अभद्र , रईसज़ादे अजय (राजकुमार) के चारों ओर घूमती है । उसे अनुशासित करने की उम्मीद में उसके दादा उसे एक हॉस्टल वाले स्कूल में भेजते हैं । अजय ने मानो संकल्प ले रखा है न सुधरने का। वह नए सुपरिन्टेंडेन्ट शेखर (अभि भट्टाचार्य) और स्कूल प्रशासन से उलझता रहता है। अजय शक्ति नामक विकलांग छात्र (रतन कुमार) से दोस्ती करता है लेकिन उसके कहने का भी कोई असर नहीं होता। शेखर बच्चों में अच्छे मूल्य अंकुरित करने के लिए कई अपारम्परिक प्रयोग करता है। अजय हॉस्टल से भागने की कोशिश करता है , शक्ति की उसे रोकने के चक्कर में एक दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है। इसका असर शक्ति पर होता है ।वह खेल और पढ़ाई दोनों में अव्वल हो जाता है। शेखर अपना सुधार अभियान फैलाने अन्यत्र कूच कर जाते हैं ।
यह गौरतलब है कि जागृति भी उसी निर्देशक की १९४९ में बनी बाँग्ला फिल्म से प्रेरित थी । राष्ट्रीय आन्दोलन का आभा मण्डल तब तक विलुप्त नहीं हुआ था। किशोर अपराध तथा तालीम के अपारम्परिक तरीकों को निर्देशक ने बिना बड़े सितारों के सुन्दर तरीके से दिखाया है । रतन कुमार एक बाल कलाकार के रूप में बिमल रॉय की दो बीघा जमीन(१९५३) तथा राज कपूर की बूट पॉलिश (१९५४) में पहले ही स्थापित हो चुका था । सत्येन बोस ने जागृति के अलावा बन्दिश , मासूम और मेरे लाल नामक बच्चों की फिल्में बनायीं । उनकी सर्वाधिक चर्चित फिल्म गांगुली ब्रदर्स और मधुबाला अभीनित चलती का नाम गाड़ी रही ।
बेदारी ( १९५७ ) के अभिनेताओं के नाम रतन कुमार , रागिणी , सन्तोष , मीना और अनुराधा है । लखनऊ के वरिष्ट चिट्ठेकार डॉ. प्रभात टण्डन ने इन नामों (सभी हिन्दू नाम) को देखकर उन्हें भारतीय मान लिया । फिल्म के प्रमुक गायक सलीम रज़ा ईसाई थे और सन्तोष १९२८ में लाहोर में पैदा हुए थे , मूल नाम सैयाद मूसा रज़ा था। सन्तोष पाकिस्तानी फिल्मों के सुधीर के बाद सुपर स्टार थे। उनकी पहली फिल्म भारत में बनी अहिन्सा थी । रतन कुमार भारत में बूट पॉलिश ,दो बीघा जमीन के अलावा बैजू बावरा ( बालक बैजू ) , बहुत दिन हुए और फुटपाथ में बाल कलाकार के रूप में आ चुका था । वह १९५६ में पाकिस्तान चला गया । जागृति की कर्बन कॉपी बेदारी में तो वह पुरानी भूमिका में था । पाकिस्तान में भी बाल भूमिका में वह वाह रे जमाने , मासूम और दो उस्ताद में आया । नायक के तौर पर पाकिस्तान में वह नागिन , नीलो , अलादीन का बेटा और नीलोफ़र ,ताज और तलवार ,शायरे इस्लाम, गज़नी बिन अब्बास , हुस्नो इश्क , बारात , समीरा , छोटी अम्मी , आसरा में आया । पाकिस्तान से भी कलाकार भारत आ कर हाथ आजमा चुके हैं और पाकिस्तानी फिल्मों में हिन्दू अभिनेता – अभिनेत्रियाँ क्रिकेट से ज्यादा तादाद में रहें हैं । आजकल भारत में लोकप्रिय हुए सुफ़ीनुमा गीतों के गायक और गायन बैण्ड से पहले की यह बात है ।
इन्टरनेट के इस सूचनावर्धक पहलू ने मुझमें पाकिस्तान की बारे में और जानने की इच्छा जगाई है ।

6 टिप्पणियां

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श्रीश शर्मा: टिप्पणियों की साज सज्जा कैसे करें

श्रीश शर्मा उर्फ़ ई-पण्डित कम्प्यूटर के शौकीन हैं और हिन्दी के प्रेमी । उम्मीद है प्रसन्न हैं और चिट्ठालोक से अलग कहीं अच्छा काम कर रहे होंगे। हिन्दी चिट्ठेकारों को काम की तकनीकी बातें सिखाया करते थे , श्रीश । उनकी यह पोस्ट मैंने अपने मेल बॉक्स में ‘लेबल’ लगा कर रखी है । जब जरूरत होती है उसका लाभ उठा लेता हूँ।

    टिप्पणियाँ करते वक्त यदि हम इन html tags का प्रयोग करें तो वे प्रभावशाली और सुन्दर हो जाती हैं । उदाहरण : लाल्टू के चिट्ठे पर अपनी टिप्पणी के अन्त में मैं हाइपर लिंक का प्रयोग कर सका । टिप्पणी करते वक्त इन html tags के प्रयोग से हम बोल्ड करना , अन्डर लाइन करना और लिंक देना आसानी से कर सकते हैं ।

  ई – पण्डित के प्रति आभार प्रकट करते हुए उनकी यह पोस्ट नए चिट्ठेकारों के फायदे के लिए यहां चेप रहा हूँ :

इस पोस्ट का शीर्षक हरिराम जी के प्रश्न से उपजा। उन्होंने यही प्रश्न पूछा था। ये पोस्ट तो लिखनी पेंडिंग थी ही, उनके प्रश्न से शीर्षक भी मिल गया। तो आज की कक्षा में विभिन्न ब्लॉग सेवाओं पर टिप्पणियाँ में साज-सज्जा करना बताया जाएगा।

वर्डप्रैस/वर्डप्रैस.कॉम

» टैक्स्ट को बोल्ड करने के लिए <b> टैग का प्रयोग करें।

उदाहरण: वाह <b>जुगाड़ी जीतू जिन्दाबाद !</b>

जिससे प्राप्त होगा: वाह जुगाड़ी जीतू जिन्दाबाद !

» टैक्स्ट को इटैलिक करने के लिए <i> टैग प्रयोग करें।

उदाहरण के लिए: जगदीश भाई का जादुई <i>आईना</i>

जिससे प्राप्त होगा: जगदीश भाई का जादुई आईना

» टैक्स्ट को अंडरलाइन करने के लिए <u> टैग प्रयोग करें।

उदाहरण: फुरसतिया तो <u>जबरिया</u> लिखै है, उनका कोई का करि है।

परिणाम: फुरसतिया तो जबरिया लिखै है, उनका कोई का करि है।

» हाइपरलिंक डालना।

अक्सर देखता हूँ कि कई टिप्पणीकार टिप्पणियों में हाइपरलिंक न डाल कर सीधे लिंक लिख देते हैं, यह भद्दा भी दिखता है और लिंक पर जाने के लिए कॉपी पेस्ट करके एड्रैस बार में डालना पड़ता है। इसकी बजाय हाइपरलिंक डालना ज्यादा सुन्दर लगता है, इसके अतिरिक्त उसे क्लिक करने पर सीधे लिंक खुल जाता है।

हाइपरलिंक डालने के लिए निम्न कोड का प्रयोग करें।

<a href=http://example.com>लिंक टैक्स्ट</a>

उदाहरण: आजकल <a href=http://girionline.com/blog>कविराज</a> गद्य भी खूब लिख रहे हैं।

परिणाम: आजकल कविराज गद्य भी खूब लिख रहे हैं।

यदि आप चाहें तो इसमें डिस्क्रिपशन भी डाल सकते हैं।

उदाहरण: कल तरुण भैया बोले कि आलोक तो <a href=http://www.readers-cafe.net/nc/?p=130 title=”तरुण का आलोक पर निठल्ला चिंतन”>नौ दो ग्यारह हो गए</a>।

परिणाम: कल तरुण भैया बोले कि आलोक तो नौ दो ग्यारह हो गए।
(लिंक पर माउस प्वाइंटर लाकर देखिए)

» संदर्भ (quote) देने के लिए निम्न कोड प्रयोग करें।

<blockquote>संदर्भ टैक्स्ट</blockquote>

उदाहरण:

फुरसतिया जी कहते हैं,
<blockquote>बिना टिप्पणी के पोस्ट विधवा की सूनी मांग की तरह होती है।</blockquote>

परिणाम:

फुरसतिया जी कहते हैं,

बिना टिप्पणी के पोस्ट विधवा की सूनी मांग की तरह होती है।

Quote किए गए टैक्स्ट का लुक अलग अलग थीम पर निर्भर करता है।

अन्य भी कुछ टैग हैं पर वो खास उपयोगी नहीं।

ब्लॉगर

ब्लॉगर अन्य चीजों में जहाँ उदार है टिप्पणियों के मामले में कंजूस है। केवल तीन HTML टैग उपलब्ध हैं <b>, <i> और <u> उनके लिए Syntax वही है जो ऊपर बताया है।

बाकी Quote करने के लिए तो टैग उपलब्ध है नहीं। अतः इसके लिए संदर्भ किए जाने वाले टैक्स्ट को डबल कोट्स (“) में लिखें तथा <b> और <i> टैग का प्रयोग करें। टैग का प्रयोग करते हुए ध्यान रखें जो टैग पहले शुरु किया है वही पहले बंद भी करना है।

उदाहरण:

किसी ने सच ही कहा है:
<b><i>”जीतू भाई से नेट पर पंगे लेना खतरे से खाली नहीं।”</i></b>

परिणाम:

किसी ने सच ही कहा है:
“जीतू भाई से नेट पर पंगे लेना खतरे से खाली नहीं।”

यदि थोड़ा और ईस्टाइल मारना है तो निम्न कोड प्रयोग करें। इस कोड से एकदम सही संदर्भ चिन्ह (quotation marks) छपेंगे।

उदाहरण:

किसी ने सच ही कहा है:
<b>&ldquo;<i rel=”cquote”>जीतू भाई से नेट पर पंगे लेना खतरे से खाली नहीं।</i>&rdquo;</b>

परिणाम:

किसी ने सच ही कहा है:
“जीतू भाई से नेट पर पंगे लेना खतरे से खाली नहीं।”

जूमला

निरंतर तथा तरकश आदि जूमला द्वारा संचालित साइटें टिप्पणियों में bbcode का प्रयोग करती हैं।

» टैक्स्ट को बोल्ड करने के लिए

उदाहरण: निरंतर विश्व की [b]पहली ब्लॉगजीन[/b] है।

परिणाम: निरंतर विश्व की पहली ब्लॉगजीन है।

» टैक्स्ट को इटैलिक करना

उदाहरण: निरंतर का [i]नया विशेषांक[/i] पढ़िए।

परिणाम: निरंतर का नया विशेषांक पढ़िए।
» टैक्स्ट को अंडरलाइन करना।

उदाहरण: लिनक्स एक [u]मुक्त स्त्रोत[/u] सॉफ्टवेयर है।

परिणाम: लिनक्स एक मुक्त स्त्रोत सॉफ्टवेयर है।

» टैक्स्ट को स्ट्राइक करना।

इससे टैक्स्ट को काटे जाने का लुक आता है। इसका प्रयोग भूल सुधार दर्शाने हेतु किया जाता है।

उदाहरण: विंडोज विस्टा के लिए न्यूनतम [s]१ जीबी [/s] ५१२ एमबी रैम चाहिए।

परिणाम: विंडोज विस्टा के लिए न्यूनतम १ जीबी ५१२ एमबी रैम चाहिए।

» हाइपरलिंक डालना।

उदाहरण: निरंतर तथा तरकश [url=http://joomla.org]जूमला[/url] द्वारा संचालित हैं।

परिणाम: निरंतर तथा तरकश जूमला द्वारा संचालित हैं।

» इमेज लगाना।

जूमला संचालित साइटों में आप टिप्पणी में इमेज भी लगा सकते हैं।

उदाहरण: [img]http://img272.imageshack.us/img272/5563/battingeyelashes6pt.gif[/img]

परिणाम:

» संदर्भ देना।

उदाहरण:

गालिब ने क्या खूब कहा है:
[quote]हुस्न वाला हो और वफा करे, ये मुमकिन नहीं इस जहाँ में[/quote]

परिणाम:

गालिब ने क्या खूब कहा है:

हुस्न वाला हो और वफा करे, ये मुमकिन नहीं इस जहाँ में

स्माइली लगाना

उपरोक्त सभी सॉफ्टवेयरों में स्माइली का प्रयोग करने संबंधी यह पोस्ट पढ़ें।

पाठकों से

» कृपया कोई गलती हो अथवा कोई चीज रह गई हो तो बताएं।

» ‘लुक’ के लिए कोई हिन्दी शब्द हो सकता है।

» ब्लॉगर में quote करने के लिए दूसरे वाले कोड में टैक्स्ट को बड़ा करने के लिए कोई तरीका है।

इस पोस्ट का शीर्षक हरिराम जी के प्रश्न से उपजा। उन्होंने यही प्रश्न पूछा था। ये पोस्ट तो लिखनी पेंडिंग थी ही, उनके प्रश्न से शीर्षक भी मिल गया। तो आज की कक्षा में विभिन्न ब्लॉग सेवाओं पर टिप्पणियाँ में साज-सज्जा करना बताया जाएगा।

वर्डप्रैस/वर्डप्रैस.कॉम

» टैक्स्ट को बोल्ड करने के लिए <b> टैग का प्रयोग करें।

उदाहरण: वाह <b>जुगाड़ी जीतू जिन्दाबाद !</b>

जिससे प्राप्त होगा: वाह जुगाड़ी जीतू जिन्दाबाद !

» टैक्स्ट को इटैलिक करने के लिए <i> टैग प्रयोग करें।

उदाहरण के लिए: जगदीश भाई का जादुई <i>आईना</i>

जिससे प्राप्त होगा: जगदीश भाई का जादुई आईना

» टैक्स्ट को अंडरलाइन करने के लिए <u> टैग प्रयोग करें।

उदाहरण: फुरसतिया तो <u>जबरिया</u> लिखै है, उनका कोई का करि है।

परिणाम: फुरसतिया तो जबरिया लिखै है, उनका कोई का करि है।

» हाइपरलिंक डालना।

अक्सर देखता हूँ कि कई टिप्पणीकार टिप्पणियों में हाइपरलिंक न डाल कर सीधे लिंक लिख देते हैं, यह भद्दा भी दिखता है और लिंक पर जाने के लिए कॉपी पेस्ट करके एड्रैस बार में डालना पड़ता है। इसकी बजाय हाइपरलिंक डालना ज्यादा सुन्दर लगता है, इसके अतिरिक्त उसे क्लिक करने पर सीधे लिंक खुल जाता है।

हाइपरलिंक डालने के लिए निम्न कोड का प्रयोग करें।

<a href=http://example.com>लिंक टैक्स्ट</a>

उदाहरण: आजकल <a href=http://girionline.com/blog>कविराज</a> गद्य भी खूब लिख रहे हैं।

परिणाम: आजकल कविराज गद्य भी खूब लिख रहे हैं।

यदि आप चाहें तो इसमें डिस्क्रिपशन भी डाल सकते हैं।

उदाहरण: कल तरुण भैया बोले कि आलोक तो <a href=http://www.readers-cafe.net/nc/?p=130 title=”तरुण का आलोक पर निठल्ला चिंतन”>नौ दो ग्यारह हो गए</a>।

परिणाम: कल तरुण भैया बोले कि आलोक तो नौ दो ग्यारह हो गए।
(लिंक पर माउस प्वाइंटर लाकर देखिए)

» संदर्भ (quote) देने के लिए निम्न कोड प्रयोग करें।

<blockquote>संदर्भ टैक्स्ट</blockquote>

उदाहरण:

फुरसतिया जी कहते हैं,
<blockquote>बिना टिप्पणी के पोस्ट विधवा की सूनी मांग की तरह होती है।</blockquote>

परिणाम:

फुरसतिया जी कहते हैं,

बिना टिप्पणी के पोस्ट विधवा की सूनी मांग की तरह होती है।

Quote किए गए टैक्स्ट का लुक अलग अलग थीम पर निर्भर करता है।

अन्य भी कुछ टैग हैं पर वो खास उपयोगी नहीं।

ब्लॉगर

ब्लॉगर अन्य चीजों में जहाँ उदार है टिप्पणियों के मामले में कंजूस है। केवल तीन HTML टैग उपलब्ध हैं <b>, <i> और <u> उनके लिए Syntax वही है जो ऊपर बताया है।

बाकी Quote करने के लिए तो टैग उपलब्ध है नहीं। अतः इसके लिए संदर्भ किए जाने वाले टैक्स्ट को डबल कोट्स (“) में लिखें तथा <b> और <i> टैग का प्रयोग करें। टैग का प्रयोग करते हुए ध्यान रखें जो टैग पहले शुरु किया है वही पहले बंद भी करना है।

उदाहरण:

किसी ने सच ही कहा है:
<b><i>”जीतू भाई से नेट पर पंगे लेना खतरे से खाली नहीं।”</i></b>

परिणाम:

किसी ने सच ही कहा है:
“जीतू भाई से नेट पर पंगे लेना खतरे से खाली नहीं।”

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किसी ने सच ही कहा है:
<b>&ldquo;<i rel=”cquote”>जीतू भाई से नेट पर पंगे लेना खतरे से खाली नहीं।</i>&rdquo;</b>

परिणाम:

किसी ने सच ही कहा है:
“जीतू भाई से नेट पर पंगे लेना खतरे से खाली नहीं।”

जूमला

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» टैक्स्ट को बोल्ड करने के लिए

उदाहरण: निरंतर विश्व की [b]पहली ब्लॉगजीन[/b] है।

परिणाम: निरंतर विश्व की पहली ब्लॉगजीन है।

» टैक्स्ट को इटैलिक करना

उदाहरण: निरंतर का [i]नया विशेषांक[/i] पढ़िए।

परिणाम: निरंतर का नया विशेषांक पढ़िए।
» टैक्स्ट को अंडरलाइन करना।

उदाहरण: लिनक्स एक [u]मुक्त स्त्रोत[/u] सॉफ्टवेयर है।

परिणाम: लिनक्स एक मुक्त स्त्रोत सॉफ्टवेयर है।

» टैक्स्ट को स्ट्राइक करना।

इससे टैक्स्ट को काटे जाने का लुक आता है। इसका प्रयोग भूल सुधार दर्शाने हेतु किया जाता है।

उदाहरण: विंडोज विस्टा के लिए न्यूनतम [s]१ जीबी [/s] ५१२ एमबी रैम चाहिए।

परिणाम: विंडोज विस्टा के लिए न्यूनतम १ जीबी ५१२ एमबी रैम चाहिए।

» हाइपरलिंक डालना।

उदाहरण: निरंतर तथा तरकश [url=http://joomla.org]जूमला[/url] द्वारा संचालित हैं।

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उदाहरण:

गालिब ने क्या खूब कहा है:
[quote]हुस्न वाला हो और वफा करे, ये मुमकिन नहीं इस जहाँ में[/quote]

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गालिब ने क्या खूब कहा है:

हुस्न वाला हो और वफा करे, ये मुमकिन नहीं इस जहाँ में

स्माइली लगाना

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पाठकों से

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» ब्लॉगर में quote करने के लिए दूसरे वाले कोड में टैक्स्ट को बड़ा करने के लिए कोई तरीका है।

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