Daily Archives: जुलाई 27, 2008

नल की हड़ताल

आज सुबह से नल था मौन ,
पता नहीं कारण था कौन ?
मैंने पूछा तनिक पास से ,
भैय्या दिखते क्यों उदास से ?
बोला , ‘क्या बतलाऊं यार ,
रोज सहन करता हूं मार .
कान ऐंठता जो भी आता ,
टांग बाल्टी मुझे सताता .
लड़ते मेरे पास खड़े हो ,
बच्चे हों या मर्द बड़े हों .
नहीं किसी को दूंगा पानी !
इसीलिए हडताल मनानी !

पास रखी तब बोली गागर ,
‘ हम हैं रीते,तुम हो सागर ,
जल्दी प्यास बुझाओ मेरी ,
सोच रहे, क्या ? कैसी देरी ?

नल को दया घडे पर आई,
पानी की झट धार बहाई ..
(कवि- अज्ञात,किसी को पता हो तो जरूर बताए )

8 टिप्पणियां

Filed under hindi, hindi poems, nursery rhymes , kids' poetry, poem, rhyme