पश्चाताप : राजेन्द्र राजन

महान होने के लिए

जितनी ज्यादा सीढ़ियाँ मैंने चढ़ीं

उतनी ही ज्यादा क्रूरताएं मैंने कीं

ज्ञानी होने के लिए

जितनी ज्यादा पोथियां मैंने पढ़ीं

उतनी ही ज्यादा मूर्खताएं मैंने कीं

बहादुर होने के लिए

जितनी ज्यादा लड़ाइयां मैंने लड़ीं

उतनी ही ज्यादा कायरताएं मैंने कीं

ओह , यह मैंने क्या किया

मुझे तो सीधे रास्ते जाना था

– राजेन्द्र राजन .

 

10 टिप्पणियाँ

Filed under hindi, hindi poems, poem

10 responses to “पश्चाताप : राजेन्द्र राजन

  1. Praveen

    Dhanyvaad itani behtareen kavita padhwane ke liye.

  2. आपके ब्लॉग राजेन्द्र राजन की कविताएं पढना हमेशा एक परिष्कृत करने वाला अनुभव होता है . दोआबा में भी उनकी कविताएं पढीं . अभी उदय जी ने भी उनकी कविताएं अपने ब्लॉग पर पोस्ट की हैं . सच में हमारे समय के बेहतरीन कवि हैं राजेन्द्र राजन .

  3. क्या बात है. बहुत सही है. वाह ! आभार इसे पढ़वाने का.

  4. पिंगबैक: दो कविताएं : श्रेय , चिड़िया की आंख , राजेन्द्र राजन « समाजवादी जनपरिषद

  5. पिंगबैक: इस चिट्ठे की टोप पोस्ट्स ( गत चार वर्षों में ) « शैशव

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