यह मुरझाया हुआ फूल है

यह मुरझाया हुआ फूल है,
इसका हृदय दुखाना मत ।
स्वयं बिखरने वाली इसकी,
पंखुड़ियाँ बिखराना मत ॥
गुजरो अगर पास से इसके,
इसे चोट पहुँचाना मत ।
जीवन की अन्तिम घड़ियों में,
देखो,इसे रुलाना मत ॥
अगर हो सके तो,
दो ठंडी बूँदें टपका देना,प्यारे ।
जल न जाए संतप्त हृदय,
शीतलता ला देना प्यारे ॥
सुभद्रा कुमारी चौहान
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4 टिप्पणियाँ

Filed under hindi poems, nursery rhymes , kids' poetry, poem, rhyme, subhadrakumari chauhan

4 responses to “यह मुरझाया हुआ फूल है

  1. सुभद्रा जी की यह रचना बहुत प्सन्द आयी, अन्य भी प्रकाशित करें…

  2. बहुत आभार सुभद्रा कुमारी चौहान की यह कविता पढ़वाने के लिये..अरसों बाद पढ़ी.

  3. itni sunder kavita padvane kae liyae dhynavaad
    aasha hae ab tabiyat mae aapki kafi sudhar ho gayaa hoga
    shighr swasth ho aur hamaesha rahen
    rachna

  4. पिंगबैक: इस चिट्ठे की टोप पोस्ट्स ( गत चार वर्षों में ) « शैशव

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