मेरी बगिया

  कटहल

लंगडा

  चम्पा

 

अमरूद पर रॉबिन

  मधुमालती

 

महुआ (१ माह पूर्व )

   सफ़ेद लिली

   लंगडा

12 टिप्पणियाँ

Filed under bagiya

12 responses to “मेरी बगिया

  1. anamdas

    बहुत भाग्यवान हैं आप, अगर आपके घर में ये पेड़ हैं, हम फ्लैट में रहने वाले हैं, इनका सुख क्या जाने, मेरा बचपन ऐसी ही बगिया में बीता है, इसका सुख मैं जानता हूँ.

  2. बाकी आप रख लो लंगडे से हमे बडी हमदर्दी है उसे हमारे पास भीजवादे

  3. वाह ! क्या बगीया है,..आपने तो हमारे मन की बात कर दी अपनी बगीया में सैर भी करने देंगे की नही,..वैसे बहुत पसंद है हमे पेड़-पौधे। दर्शन के लिये धन्यवाद।
    सुनीता(शानू)

  4. वाह …. भाई कभी हमे भी घर बुलायिये … तस्वीरों से कहे बहलाते हैं….

  5. वाह भाई, चित्र में ही सही, बगिया का आनन्द ले लिया. बहुत बढ़िया.

  6. paramjitbali

    अनामदास जी,शहरों ने सब छीन लिआ है।अब तो ऎसे बागों के सपने ही ले सकते हैं हम शहर वाले।

  7. भाईसाहब.. आपने तो ईष्या का जलाशय खोद दिया है मेरे भीतर..
    क्या करूं.. इस ताप का..
    ये तो किसी बगिया में ही ठण्डा हो सकता है..

  8. बहुत सुन्दर बगिया है आपकी । आप लंगड़े का आनन्द लीजिये मैं केसर का लूँगी । अपनी बगिया की सैर कराने के लिये धन्यवाद ।
    घुघूती बासूती

  9. और कौन से पंछी आते हैं ? जरा उन्हें भी दिखाईये ।

  10. वह !!!क्या बात है आपकी बगिया की.. हमे तो आप सफ़ेद लिली ही दे दें:)

  11. क्या बात है हुजूर ! आपकी बगिया देख मन प्रसन्न हो गया ।

  12. पिंगबैक: इस चिट्ठे की टोप पोस्ट्स ( गत चार वर्षों में ) « शैशव

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