पू. साने गुरुजी का समग्र साहित्य हिन्दी में

श्री पांडुरंग सदाशिव साने उर्फ़ साने गुरुजी महाराष्ट्र के स्वनामधन्य लेखक और श्रेष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता थे । उनके विचारों की दायपर महाराष्ट्र की तीन पीढियाँ पलीं । राष्ट्रसेवा, समाजसेवा और मानव सेवा में इन पीढियोंने अपनी पूरी जिन्दगी लगा दी ।

    आज भी पू. साने गुरुजी का साहित्य युवक-युवतियों, बालकों तथा वृद्धों का विचार-विश्व समृद्ध करता रहता है। पू. साने गुरुजी कथामाला ने यह तय किया है कि उनका समग्र साहित्य हिन्दी में प्रकाशित किया जाय। जिसमें लगभग १२० किताबें हैं ।पहली कड़ी में चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं ।

भारतीय नारी – साने गुरुजी

अनुवाद – डॉ. पीतांबर सरोदे

साने गुरुजी की अखंड ज्ञानसाधना का परिचय देनेवाली यह पुस्तक भारतीय नारी की वेदकाल से लेकर इक्कीसवीं सदी तक की यात्रा का सम्यक परिचय देती है।वह अपार त्याग की प्रतिमा है।वेदकाल में वह स्वाश्रयी, ज्ञानी तथा कष्ट करने वाली थी।वेदोत्तर काल में उसे गौणत्व आया।महात्मा फुले,गोपाल गणेश आगरकर के समय नारी जीवन कई बन्धनों से घिरा हुआ था ।पर स्वतंत्रता आंदोलन में गांधीजीने उसकी मुक्ति की राह खोल दी।विभिन्न क्षेत्रोंमें भारतीय नारीने अपना योगदान दिया। छोटी-सी यह पुस्तक ‘भारतीय नारी’ के विकास का सच्चा लेखा-जोखा है। कीमत – रु. ११/-

हिमालय के शिखर – साने गुरुजी

                                    अनुवाद – डॉ. विश्वास पाटील

राम का वर्णन करते हुए वाल्मीकिने कहा कि उनमें हिमालय की अडिगता और सागर की गंभीरता है। साने गुरुजीने भारतीय जीवन के कुछ ऐसे ही उत्तुंग चरित्रोंको चुना जिनमें स्त्री-पुरुष दोनों हैं – जो हमें प्रभावित करते हैं। युवा पीढी को हम इस ग्रंथ के माध्यम से उस भव्य भारत का परिचय करा देंगे जिसकी ईंट- ईंट इन सपूतोंने रची। भारत का भाल उज्वल करनेवाले ये पात्र सही मानेमें ‘हिमालय के शिखर’ हैं। कीमत – रु. २१/-

भगवान श्रीकृष्ण – साने गुरुजी

अनुवाद – डॉ. निशा ढवळे

भगवान श्रीकृष्ण का चरित्र मानवीय सद्गुणोंसे पूर्णत: संपन्न चरित्र है। साने गुरुजी ने इस चरित्र में श्रीकृष्ण के उन कार्योंका विशद विवरण किया जो चमत्कार नहीं,मानवों की विविधांगी रक्षा करनेवाले थे। कृष्ण एक जननायक थे।उनके इसी जननायकत्व की चर्चा साने गुरुजीने प्रस्तुत पुस्तक में की है। देवी-देवताओं के चरित्र चमत्कारों के लिए नहीं ,राष्ट्रनिर्माण के लिए और जीवन को मूल्य संपन्न बनाने के लिए हों,ऐसी प्रेरणा यह पुस्तक देती है। कीमत – रु. ११/-

मेरे देवता – साने गुरुजी

अनुवाद – डॉ. मु. ब. शाह

साने गुरुजी कहते हैं ‘मानवी देवताओंने ही नहीं,मनवेतर देवताओं ने तक मुझपर कृपा की बरसात की। इस सारी सजीव सृष्टि में मेरी परवरिश हुई है।’ जिन जिन का उनके जीवनपर मंगल प्रभाव पडा उन देवताओं की अनोखी कहानी ,अनोखा चिंतन इस पुस्तक में है। प्रभाव डालनेवाले ये देवता हैं – आकाश ,प्रकाश,पानी,प्राचीन ऋषिवर,ध्रुव और प्रह्लाद । कीमत – रु.१५/-

शीघ्र प्रकाशित होनेवाली पुस्तकें

गीता हृदय – साने गुरुजी

अनुवाद – डॉ. विश्वास पाटील

धूलिया के कारावासमें पू. विनोबाजी ने जो प्रवचन दिए वे ‘गीता प्रवचन’ के रूपमें भारत की भाषा भगिनियों के कंठहार बने। उसके पहले और बाद में भी साने गुरुजी के जीवन में गीता का स्थान वरेण्य रहा । गीता के १८ अध्यायों को गुरुजी ने अपनी प्राणवान शैली में न केवल दुहराया है अपितु उनकी नई और युगसंमत व्याख्या भी की है। गीतामें बुद्धि से प्रवेश तो किया जा सकता है पर हृदय के बिना बाहर निकला नहीं जा सकता। साने गुरुजी की यह पुस्तक गीता का बुद्धिसंपन्न आलेखन है ।

कौए – साने गुरुजी

अनुवाद – डॉ. पीतांबर सरोदे

कहने के लिए यह कौवों की कहानी है। पर उनके बहाने पू. साने गुरुजी ने मनुष्य जाति के सद्गुण और दुर्गुणोंकी बड़ी सटीक व्याख्या की है।मनुष्य जगत से पक्षी और पशु जगतका न्याय अधिक तर्कसंगत कैसे है यह बताते हुए उन्होंने मनुष्य जाति के पशु-पक्षी जगत के साथ होनेवाले दुर्व्यवहारोंकी मार्मिक व्याख्या की है।पुस्तक एकार्थ में पूरे मानव जाति के व्यवहार की मर्मकथा है।

मोरी गाय – साने गुरुजी

अनुवाद – डॉ. विश्वास पाटील

साने गुरुजी के जीवनमें अद्वैत का जो विचार रम गया था उसके परिणाम स्वरूप चराचर सृष्टिमें उन्हें चैतन्य के दर्शन हुए।पशु-पक्षी हमारे न केवल संगी-साथी हैं,अपितु हमारे जीवन के पक्षधर भी हैं। गाय को गाँधीजी ‘करुणा की कविता’ कहते थे। गाय,गंगा,गीता,गाँव और गाँधी भारत के पंचप्राण हैं। गाय का मनुष्य जीवनमें जो स्थान है वह प्रकृति और पर्यावरणमें संतुलन का है। साने गुरुजी ने इस माध्यम से गाय की महिमा का वर्णन किया है। न केवल बच्चों के लिए वरन तमाम विचारशील लोगों के लिए अत्यावश्यक है यह पुस्तक।

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इन पुस्तकों को निम्न पते से मँगवाया जा सकता है :

प्राचार्य अनिल लोहार

सीताराम बाहेती कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स,

पोस्ट/जिला जळगाँव (महाराष्ट्र)

इन पुस्तकों के प्रकाशक –

Technorati tags: ,

श्री पन्नालाल सुराणा,

अध्यक्ष, अ.भा. साने गुरुजी कथामाला,

साने गुरुजी हाई स्कूल,

भिकोबा पाठारे मार्ग,

दादर(पूर्व), मुंबई.

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1 टिप्पणी

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One response to “पू. साने गुरुजी का समग्र साहित्य हिन्दी में

  1. पिंगबैक: इस चिट्ठे की टोप पोस्ट्स ( गत चार वर्षों में ) « शैशव

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