तीसरा दृश्य मगनवाड़ी का । बारह वर्षों का मौन चल रहा था । लेकिन बापू ने बहस करके भगवान का नामोच्चारण करने की छूट उनसे मंजूर करायी । उनकी दोनों बगलों में काख – बिलाई के फोड़े एक के बाद एक हो रहे थे । देखनेवाला सहम जाता था । लेकिन भणसाळीकाका का चरखा चालू [...]
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July 21, 2008
भणसाळीकाका : ले. नारायण देसाई
एक बार काका ने सेवाग्राम - आश्रम का वर्णन ‘ गांधीजी का प्राणि – संग्रहालय’ ( गांधीजीज मिनाझरी) इस शब्दों में किया था। बापू के आसपास हमेशा अजीब तरह के लोग जमा हो जाते थे । कभी – कभी सरदार कुछ पर चिढ़ भी जाते थे । काका हँसकर कहते थे , ‘ बापू तो डॊक्टर [...]
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