आ
मैं तुझे खुद में शामिल करता हूँ
मेरी रातों में कही जा तू कविता
फैलता हुआ तुझे थामने स्थिर होता
लील लेता तुझे जब
धरती पर अनंत दुखों का लावा पिघलता ।
बहुत दिनों के बाद तुझसे रूबरू होता हूँ ।
मेरी उँगलियाँ बंद पड़ी हैं
उन्हें खुलने से डर लगता है ।
तू मेरे आकाश में है
आ तू मेरे सीने पे आ
मेरी [...]
Posts Tagged as ‘laltu’
September 3, 2009
लाल्टू की चुनी हुई कवितायें
August 29, 2009
लाल्टू की सात कवितायें
[ लाल्टू भौतिकी के प्रोफ़ेसर हैं । कवि और कहानीकार हैं । अध्यापक राजनीति से भी जुड़े रहे हैं । ब्लॉग के माध्यम को भी उन्होंने तरजीह दी। इन दिनों मुझे उन्हें बार - बार घेरने का मौका मिला है । नतीजन , उनकी कवितायें मिली हैं । ]
१. स्केच २००८
अभी कोई घंटे भर पहले शाम [...]
June 19, 2009
आरक्षित सफ़र और असुरक्षित संस्थान
दक्षिण में दोनों प्रकार के आरक्षण के प्रति चेतना अधिक है । नौकरियों में अधिक पहले से आरक्षण होने के कारण दोनों प्रकारों के आरक्षण के प्रति परिपक्वता भी लाजमी तौर पर वहाँ अधिक है । आरक्षण के दो प्रकारों से मेरा आशय नौकरियों तथा रेल के आरक्षण से है । उत्तर में आम तौर [...]
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