छुटपन में ऐसा होता था अक्सर
कि कोई टोके
कि फल के साथ ही तुमने खा लिया है बीज
इसलिए पेड़ उगेगा तुम्हारे भीतर
मेरे भीतर पेड़ उगा या नहीं
पता नहीं
क्योंकि मैंने किसी को कभी
न छाया दी न फल न वसंत की आहट
लेकिन आज जब मैंने
एक जवान पेड़ को कटते हुए देखा
तो मैंने सुनी अपने भीतर
एक हरी – भरी [...]
Posts Tagged as ‘राजेन्द्र राजन’
February 25, 2009
कविता : पेड़ : राजेन्द्र राजन
July 9, 2008
यह कौन-सी अयोध्या है ? : राजेन्द्र राजन
अयोध्या का यही अर्थ हम जानते थे
जहाँ न हो युद्ध
हो शांति का राज्य
अयोध्या की यही नीति हम जानते थे
जहाँ सबल और निर्बल
बिना भय के
पानी पीते हों एक ही घाट
अयोध्या की यही रीति हम जानते थे
जहाँ प्राण देकर भी
सदा निभाया जाये
दिया गया वचन
यह था अयोध्या का चरित्र
गद्दी का त्याग और वनवास
गद्दी के लिए खूनी खेल नहीं
अयोध्या का [...]
June 27, 2008
पश्चाताप : राजेन्द्र राजन
महान होने के लिए
जितनी ज्यादा सीढ़ियाँ मैंने चढ़ीं
उतनी ही ज्यादा क्रूरताएं मैंने कीं
ज्ञानी होने के लिए
जितनी ज्यादा पोथियां मैंने पढ़ीं
उतनी ही ज्यादा मूर्खताएं मैंने कीं
बहादुर होने के लिए
जितनी ज्यादा लड़ाइयां मैंने लड़ीं
उतनी ही ज्यादा कायरताएं मैंने कीं
ओह , यह मैंने क्या किया
मुझे तो सीधे रास्ते जाना था
- राजेन्द्र राजन .
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