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बेतरतीब आवरगी

img_0149.jpgimg_0148.jpgimg_0148.jpgimg_0147.jpgइस बगीचे की क्यारियों में इस बार एक गजब की बेतरतीब आवरगी पसरी हुई है । ‘अंतर्गृही - यात्रा’ कर रही महिलाएं चन्दन शहीद और आदि केशव के बीच वरुणा-गंगा के संगम की रेत पर जैसे अपनी चटक रंगों की साड़ियाँ दूर-दूर तक फैला देती हैं ।

    यह छोटी कलमी ‘आम्रपाली’ भी पहली बार यूँ बौराई है ।

मेरी बगिया ( २ )

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    अनामदासजी , भाग्यवान जरूर हूँ कि महमना मालवीय द्वारा स्थापित इस परिसर में रहता हूँ। जिन चित्रों को यहाँ पेश कर रहा हूँ वे हमारे आवास की बगिया के हैं । मेरी पत्नी डॉ. स्वाति काशी विश्वविद्यालय में भौतिकी की व्याख्याता हैं।अधिकांश फलदार वृक्ष - लंगडा , अमरूद , चार तरह के नीबू , कटहल ,  ताड़ प्रोफ़ेसर कैलाशचन्द्र बसुचौधरीजी के लगाये हुए हैं। वे इसी आवास में कई वर्ष रहे और अवकाश-प्राप्ति के बाद आगरा में हैं ।प्रो. बसुचौधरी मेरे साढू भी हैं। इस आवास को हम पसन्द करते थे और पत्नी को वरिष्टता के आधार पर , कुछ साल पहले यह आवण्टित भी हो गया । अब अवकाशप्राप्ति तक यह आवास नहीं छोड़ना है ।

    बचपन में भाई - बहन (बड़े) का एक बॉक्स कैमेरा था - कोडाक ब्राउनी , दरजा आठ में पहुँचे तब हमारे हाथ आया । स्कूल में फिल्म की धुलाई पर भी हाथ आजमाने का अवसर मिला । बहरहाल वह बक्से वाला कैमेरा शायद किसी भतीजे को दे दिया गया था । साल - डेढ़ साल पहले एक छोटी बहन और एक भाभी ने यह कैमेरा भेंट दिया जिससे से फिर तसवीरें खींच रहा हूँ । मेरे साथी चंचल मुखर्जी का कहना था कि कैमेरा एक काम का औजार है, पुलिस दमन आदि की फोटू बतौर प्रमाण खींच कर रखी जा सकती है ।

    प्रत्यक्षा , पक्षियों के चित्र खींचना सरल नहीं है । काफ़ी धीरज चाहिए। उनमें कुछ ज्यादा शर्मीले पक्षियों की तसवीर खींचने में धीरज ,फुरसत , तकनीक और तालीम की जरूरत शायद और अधिक हो ? इस कठफोडवे को देख पा रही हैं ?

अपनी लाल कलगी के कारण शायद ध्यान खीच ले । मैंने पाया है कि अक्सर लोग हुदहुद को कठफोड़वा समझ बैठते हैं । बड़ी तसवीर को छाँट कर दिखा पा रहा हूँ। कुछ दिन पहले कुछ चिट्ठाकार कौए न दिखने से परेशान थे । मुझे बचपन में देखे हुए कौओं के सम्मेलनों की स्पष्ट याद है,लेकिन फिलहाल इन महाशय को खींचने के लिए मुझे एक बड़े सेमर के पेड़ सहित खींचना पड़ा - 

    आज कल एक लाल चक्षु कोयल(सभी कोयलों की आँखें लाल ही होती होंगी) कटहल और चम्पा पर आती है । कोयल की तसवीर लेना एक चुनौती है। लेकिन इनको मैं सफेद पेट वाली रॉबिन जानता हूँ -

और इस सुन्दर फूल का नाम कोई बताए,मैं नहीं जानता -

  यह गन्धराज नामक नीबू है । कुछ लम्बोतरे,मोटी खाल और विशिष्ट सुगन्ध वाले।

  इस नीबू की खाल पतली है और फल के कुल वजन में रस का अनुपात ज्यादा ।

    आप सब इस छोटी से बगिया को देखने आ सकते हैं- खैरम कदम । लिली के बल्ब ,कटहल,आम,नीबू - रहा तो मिल भी सकता है ।

मेरी बगिया

  कटहल

लंगडा

  चम्पा

 

अमरूद पर रॉबिन

  मधुमालती

 

महुआ (१ माह पूर्व )

   सफ़ेद लिली

   लंगडा


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