‘ शैशव ‘ में सब निर्मल होता है । ‘लौंडपन’ में दिमागी मल की गुंजाइश । इसलिए घुटने में दिमाग लिए लोगों की चर्चा इस चिट्ठे पर सर्वथा अनुचित है । फिर भी, जिनके घरों में संडास नहीं होते उन्हें खुले मैदान मे जाने की छूट तो है ही – उन्हें निपटने का मौलिक अधिकार है [...]
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