Entries from October 2008

October 14, 2008

पीटर उर्फ़ रमेश उर्फ़ 220.226.30.26 से संवाद

‘ शैशव ‘ में सब निर्मल होता है । ‘लौंडपन’ में दिमागी मल की गुंजाइश । इसलिए घुटने में दिमाग लिए लोगों की चर्चा इस चिट्ठे पर सर्वथा अनुचित है । फिर भी, जिनके घरों में संडास नहीं होते उन्हें खुले मैदान मे जाने की छूट तो है ही – उन्हें निपटने का मौलिक अधिकार है [...]