चलो भाई चारे को बोओ
अक्कड मक्कड ,
धूल में धक्कड,
दोनों मूरख,
दोनों अक्खड,
हाट से लौटे,
ठाट से लौटे,
एक साथ एक बाट से लौटे .
बात बात में बात ठन गयी,
बांह उठीं और मूछें तन गयीं.
इसने उसकी गर्दन भींची,
उसने इसकी दाढी खींची.
अब वह जीता,अब यह जीता;
दोनों का बढ चला फ़जीता;
लोग तमाशाई जो ठहरे -
सबके खिले हुए थे चेहरे !
मगर एक [...]
Entries from September 2008
September 29, 2008
दोनों मूरख , दोनों अक्खड़ / भवानीप्रसाद मिश्र
September 18, 2008
सांप्रदायिकता : हम क्या करें ? क्या न करें
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भाग १ , भाग २
हम क्या करें ? क्या न करें ?
साम्प्रदायिकता उभाड़ने वाली किसी भी दुष्प्रवृत्ति के शिकार हम खुद न हों , और समाज में साम्प्रदायिकता उभाड़ने वाली कोशिशों के खिलाफ़ खड़े हों , फिर चाहे ऐसी कोशिश हिन्दुओं के द्वारा हो या मुसलमानों के द्वारा हो या अन्य किसी [...]
September 17, 2008
क्यों बढ़ रही है यह साम्प्रदायिकता ?
साम्प्रदायिकता क्या है ? उसके खतरे क्या हैं ? ( पिछला भाग )
क्यों बढ़ रही है यह साम्प्रदायिकता ? कौन है इसके लिए जिम्मेदार ?
धर्मों के उन्माद फैलाकर सत्ता हासिल करने की हर कोशिश साम्प्रदायिकता को बढ़ाती है , चाहे वह कोशिश किसी भी व्यक्ति , समूह या दल के द्वारा क्यों न होती हो । [...]
September 16, 2008
साम्प्रदायिकता क्या है? उसके खतरे क्या हैं ?
साम्प्रदायिकता है – अपनी पूजा-पाठ-उपासना-विधियों , खान-पान,रहन-सहन के तौर-तरीकों , जाति-नस्ल आदि की भिन्नताओं को ही धर्म का आधार मानना तथा अपनी मान्यता वाले धर्म को सर्वश्रेष्ठ और दूसरी मान्यता वाले धर्मों को निकृष्ट समझना , उनके प्रति नफरत , द्वेष-भाव पालना और फैलाना ।
अपने लिए श्रेष्ठता और दूसरों के प्रति निकृष्टता का यही भाव [...]
September 12, 2008
विदेशी माध्यम का अभिशाप : गांधीजी
[ हैदराबाद में लोक-शिक्षा निदेशक नवाब मसूद जंग बहादुर ने कर्वे महाविद्यालय में देशी भाषाओं की शिक्षा का माध्यम बनाने की बहुत जोरदार दलील दी थी । 'टाइम्स ऑफ़ इण्डिया ' ने इसका उत्तर दिया था जिसमें एक अंश था ,
' राजा राममोहन राय से महात्मा गांधी तक जिस भारतीय ने भी किसी क्षेत्र में [...]
September 6, 2008
अब एक्स्प्लोरर पर भी अन्तर्ध्यान होना मुमकिन
इन्टरनेट एक्स्प्लोरर पर चैटियाने के लिए गूगल चैट का प्रयोग करने वालों के लिए अन्तर्ध्यान होना मुमकिन हो गया है । ऐसा अब तक मोज़िला का ब्राउज़र इस्तेमाल करने वालों के लिए ही सम्भव था । यानी , यदि आप अदृश्य हो जाएंगे तब जब तक आप नहीं चाहेंगे कोई चैटियाने के लिए टपक न सकेगा [...]
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