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	<title>Comments on: &#8221; मगर, आपका असली नाम क्या है ?&#8221;</title>
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	<description>बचपन</description>
	<pubDate>Sun, 27 Jul 2008 05:06:53 +0000</pubDate>
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		<title>By: समीर लाल</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2008/05/09/myrealname/#comment-370</link>
		<dc:creator>समीर लाल</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 May 2008 22:44:50 +0000</pubDate>
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		<description>कितना अच्छा नाम तो है, फिर काहे लोग हैरान किये हैं??? 

&lt;b&gt;"अफलातून"&lt;/b&gt;

-आप तो कान ही मत दो इस जालिम दुनिया के जालिम प्रश्नों पर. :)

जिसको मानना है कि राज खुल गया तो खुल गया और बंद है तो बंद. हा हा!! 

-----------------------------------
आप हिन्दी में लिखते हैं. अच्छा लगता है. मेरी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं, इस निवेदन के साथ कि नये लोगों को जोड़ें, पुरानों को प्रोत्साहित करें-यही हिन्दी चिट्ठाजगत की सच्ची सेवा है. 
एक नया हिन्दी चिट्ठा किसी नये व्यक्ति से भी शुरु करवायें और हिन्दी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें.
यह एक अभियान है. इस संदेश को अधिकाधिक प्रसार देकर आप भी इस अभियान का हिस्सा बनें.
शुभकामनाऐं. 
समीर लाल
(उड़न तश्तरी)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>कितना अच्छा नाम तो है, फिर काहे लोग हैरान किये हैं??? </p>
<p><b>&#8220;अफलातून&#8221;</b></p>
<p>-आप तो कान ही मत दो इस जालिम दुनिया के जालिम प्रश्नों पर. :)</p>
<p>जिसको मानना है कि राज खुल गया तो खुल गया और बंद है तो बंद. हा हा!! </p>
<p>&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8211;<br />
आप हिन्दी में लिखते हैं. अच्छा लगता है. मेरी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं, इस निवेदन के साथ कि नये लोगों को जोड़ें, पुरानों को प्रोत्साहित करें-यही हिन्दी चिट्ठाजगत की सच्ची सेवा है.<br />
एक नया हिन्दी चिट्ठा किसी नये व्यक्ति से भी शुरु करवायें और हिन्दी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें.<br />
यह एक अभियान है. इस संदेश को अधिकाधिक प्रसार देकर आप भी इस अभियान का हिस्सा बनें.<br />
शुभकामनाऐं.<br />
समीर लाल<br />
(उड़न तश्तरी)</p>
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	<item>
		<title>By: mamta</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2008/05/09/myrealname/#comment-369</link>
		<dc:creator>mamta</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 May 2008 07:20:26 +0000</pubDate>
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		<description>अच्छा किया जो नाम का राज खोल दिया। :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अच्छा किया जो नाम का राज खोल दिया। :)</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: neeraj1950</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2008/05/09/myrealname/#comment-367</link>
		<dc:creator>neeraj1950</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 May 2008 06:44:52 +0000</pubDate>
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		<description>शेक्ष्पीअर ने कहा था "नाम में क्या रखा है" .आप के संस्मरण बहुत धयान से पढे और खूब आनंद उठाया. आप जैसे व्यक्ति को चाहे जिस नाम से पुकारा जाए आप रहेंगे विलक्षण ही.
नीरज</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शेक्ष्पीअर ने कहा था &#8220;नाम में क्या रखा है&#8221; .आप के संस्मरण बहुत धयान से पढे और खूब आनंद उठाया. आप जैसे व्यक्ति को चाहे जिस नाम से पुकारा जाए आप रहेंगे विलक्षण ही.<br />
नीरज</p>
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		<title>By: chandrabhushan</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2008/05/09/myrealname/#comment-366</link>
		<dc:creator>chandrabhushan</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 May 2008 06:44:40 +0000</pubDate>
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		<description>मेरे ख्याल से जिस दार्शनिक का नाम हम अंग्रेजी में प्लेटो पढ़ते हैं, वह उसके मूल नाम से बहुत दूर का है। दर्शन की पुरानी किताबों में इस व्यक्ति के नाम की स्पेलिंग का आखिरी अक्षर ओ न होकर एन है। यूरोप में नवजागरण की शुरुआत इटली से हुई थी लिहाजा ज्यादातर व्यंजनांत पूर्वी नामों को स्वरांत बनाकर उनका बंटाधार कर दिया गया। मूल ग्रीक या एरेमेइक जुबान में यह नाम प्लातोन या प्लातून (PLATON) के करीब ही उच्चरित होता था। जैसे स्कूल को हम लोग इस्कूल या स्टाफ को अस्टाफ बोलते हैं, उसी तरह पूरब की अरबी-फारसी जुबानों में प्लातून को बिना किसी विकृति के सहज उच्चारण के रूप में अफलातून बोला जाने लगा। अफलातून देसाई तक आते-आते इसमें कुछ न कुछ अर्थ-ध्वंस भी हुआ ही है, लेकिन इससे इतर मेरी राय यही है कि प्लेटो की तुलना में अफलातून उच्चारण संबंधित दार्शनिक के मूल नाम के कहीं ज्यादा करीब है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मेरे ख्याल से जिस दार्शनिक का नाम हम अंग्रेजी में प्लेटो पढ़ते हैं, वह उसके मूल नाम से बहुत दूर का है। दर्शन की पुरानी किताबों में इस व्यक्ति के नाम की स्पेलिंग का आखिरी अक्षर ओ न होकर एन है। यूरोप में नवजागरण की शुरुआत इटली से हुई थी लिहाजा ज्यादातर व्यंजनांत पूर्वी नामों को स्वरांत बनाकर उनका बंटाधार कर दिया गया। मूल ग्रीक या एरेमेइक जुबान में यह नाम प्लातोन या प्लातून (PLATON) के करीब ही उच्चरित होता था। जैसे स्कूल को हम लोग इस्कूल या स्टाफ को अस्टाफ बोलते हैं, उसी तरह पूरब की अरबी-फारसी जुबानों में प्लातून को बिना किसी विकृति के सहज उच्चारण के रूप में अफलातून बोला जाने लगा। अफलातून देसाई तक आते-आते इसमें कुछ न कुछ अर्थ-ध्वंस भी हुआ ही है, लेकिन इससे इतर मेरी राय यही है कि प्लेटो की तुलना में अफलातून उच्चारण संबंधित दार्शनिक के मूल नाम के कहीं ज्यादा करीब है।</p>
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		<title>By: प्रमोद सिंह</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2008/05/09/myrealname/#comment-365</link>
		<dc:creator>प्रमोद सिंह</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 May 2008 06:06:19 +0000</pubDate>
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		<description>शायद घरवालों के मन में यह भोला मोह रहा होगा कि कम से कम बच्‍चे के अफ़लू (फ्लू नहीं)वाली अक़ल आ जाय? या और नहीं तो.. अपनी प्‍लाटून ही खड़ा करने लायक बन जाये? ख़ैर, कोई बात नहीं, घरवालों का मोह होता ही इसलिए है कि फल और प्‍लाटून बनने की जगह महज़ माया बनकर रह जाये..</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शायद घरवालों के मन में यह भोला मोह रहा होगा कि कम से कम बच्‍चे के अफ़लू (फ्लू नहीं)वाली अक़ल आ जाय? या और नहीं तो.. अपनी प्‍लाटून ही खड़ा करने लायक बन जाये? ख़ैर, कोई बात नहीं, घरवालों का मोह होता ही इसलिए है कि फल और प्‍लाटून बनने की जगह महज़ माया बनकर रह जाये..</p>
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	</item>
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		<title>By: संजय बेंगाणी</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2008/05/09/myrealname/#comment-364</link>
		<dc:creator>संजय बेंगाणी</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 May 2008 04:56:16 +0000</pubDate>
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		<description>पहले मुझे लगा था, तक़लुश उपनाम जैसा कुछ होगा. मगर फिर अनुपजी ने बताया की इनके पिताजी द्वारा रखा गया है. अफ्लातुन...नाम है जी :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पहले मुझे लगा था, तक़लुश उपनाम जैसा कुछ होगा. मगर फिर अनुपजी ने बताया की इनके पिताजी द्वारा रखा गया है. अफ्लातुन&#8230;नाम है जी :)</p>
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		<title>By: अरूण</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2008/05/09/myrealname/#comment-363</link>
		<dc:creator>अरूण</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 May 2008 04:26:52 +0000</pubDate>
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		<description>हम तो सम्झे थे कि बचपन मे आप अफ़लातूनी हरकते करते रहते होगे तभ घर वालो के प्यार मे इस नाम से पुकारना शुरु किया होगा,और यही आपने मुख्य रूप से स्वीकार कर लिया , आफ़िसियल नाम दूसरा होगा  :) चलिये परदा तो उठा  :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हम तो सम्झे थे कि बचपन मे आप अफ़लातूनी हरकते करते रहते होगे तभ घर वालो के प्यार मे इस नाम से पुकारना शुरु किया होगा,और यही आपने मुख्य रूप से स्वीकार कर लिया , आफ़िसियल नाम दूसरा होगा  :) चलिये परदा तो उठा  :)</p>
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		<title>By: swapandarshi</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2008/05/09/myrealname/#comment-362</link>
		<dc:creator>swapandarshi</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 May 2008 04:25:07 +0000</pubDate>
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		<description>apakaa naam shayad Aflatoon ke alaawa ho bhi kya saktaa hai?

achchha laga ki ye aapakaa sachmuch ka naam hai.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>apakaa naam shayad Aflatoon ke alaawa ho bhi kya saktaa hai?</p>
<p>achchha laga ki ye aapakaa sachmuch ka naam hai.</p>
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		<title>By: दीपक भारतदीप</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2008/05/09/myrealname/#comment-361</link>
		<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 May 2008 03:57:45 +0000</pubDate>
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		<description>दिलचस्प परिचय है आपका! वैसे आपका नाम अफलातून प्रसिद्ध हो गया है और आप चाहें भी तो हम आपको दूसरे नाम से पुकार नहीं पायेंगे.
दीपक भारतदीप</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>दिलचस्प परिचय है आपका! वैसे आपका नाम अफलातून प्रसिद्ध हो गया है और आप चाहें भी तो हम आपको दूसरे नाम से पुकार नहीं पायेंगे.<br />
दीपक भारतदीप</p>
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		<title>By: kakesh</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2008/05/09/myrealname/#comment-360</link>
		<dc:creator>kakesh</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 May 2008 01:18:48 +0000</pubDate>
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		<description>राज़ राज़ ही रहा या खुल गया :-)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>राज़ राज़ ही रहा या खुल गया :-)</p>
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