यह मुरझाया हुआ फूल है,
इसका हृदय दुखाना मत ।
स्वयं बिखरने वाली इसकी,
पंखुड़ियाँ बिखराना मत ॥
गुजरो अगर पास से इसके,
इसे चोट पहुँचाना मत ।
जीवन की अन्तिम घड़ियों में,
देखो,इसे रुलाना मत ॥
अगर हो सके तो,
दो ठंडी बूँदें टपका देना,प्यारे ।
जल न जाए संतप्त हृदय,
शीतलता ला देना प्यारे ॥
- सुभद्रा कुमारी चौहान

सुभद्रा जी की यह रचना बहुत प्सन्द आयी, अन्य भी प्रकाशित करें…
बहुत आभार सुभद्रा कुमारी चौहान की यह कविता पढ़वाने के लिये..अरसों बाद पढ़ी.
itni sunder kavita padvane kae liyae dhynavaad
aasha hae ab tabiyat mae aapki kafi sudhar ho gayaa hoga
shighr swasth ho aur hamaesha rahen
rachna