यह मुरझाया हुआ फूल है

यह मुरझाया हुआ फूल है,
इसका हृदय दुखाना मत ।
स्वयं बिखरने वाली इसकी,
पंखुड़ियाँ बिखराना मत ॥
गुजरो अगर पास से इसके,
इसे चोट पहुँचाना मत ।
जीवन की अन्तिम घड़ियों में,
देखो,इसे रुलाना मत ॥
अगर हो सके तो,
दो ठंडी बूँदें टपका देना,प्यारे ।
जल न जाए संतप्त हृदय,
शीतलता ला देना प्यारे ॥
- सुभद्रा कुमारी चौहान

3 Responses to “यह मुरझाया हुआ फूल है”


  1. 1 Nazar April 4, 2008 at 12:25 am

    सुभद्रा जी की यह रचना बहुत प्सन्द आयी, अन्य भी प्रकाशित करें…

  2. 2 समीर लाल April 4, 2008 at 6:09 am

    बहुत आभार सुभद्रा कुमारी चौहान की यह कविता पढ़वाने के लिये..अरसों बाद पढ़ी.

  3. 3 rachna April 4, 2008 at 9:19 am

    itni sunder kavita padvane kae liyae dhynavaad
    aasha hae ab tabiyat mae aapki kafi sudhar ho gayaa hoga
    shighr swasth ho aur hamaesha rahen
    rachna


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