Entries from April 2008

April 18, 2008

मेरे चिट्ठों पर/से आवाजाही (१)

मेरे चार सक्रिय हिन्दी चिट्ठे हैं :

समाजवादी जनपरिषद , उत्तर प्रदेश
यही है वह जगह
शैशव
आगाज़ 

    इनके अलावा एक पुस्तक – चिट्ठा और चार अंग्रेजी चिट्ठे । वर्डप्रेस वालों ने हाल ही में चिट्ठों से सम्बन्धित सांख्यिकी देनी शुरु की है । विश्लेषण में न जा कर मैं वर्डप्रेस के अपने चिट्ठों की आवाजाही , कहाँ से [...]

April 16, 2008

कविता : ब्लैक बोर्ड : ज्ञानेन्द्रपति

 
औचक पहुँचे , उस दिन हमने
साँझ को शुरु होते देखा
चनमा सट्टी चौराहे पर की
उस चाय – दुकान में
ढलती साँझ हमारे पहुँचने तक
जो गहगह होती थी

अब जानता हूँ
उस चाय – दुकान की साँझ
बहुत पहले शुरु हो जाती है
दोपहर ढलते ही
तिपहरी के साथ

उस चाय – दुकान [...]

April 14, 2008

कविता : खून का रिश्ता : ज्ञानेन्द्रपति

वे बच्चे
मूँडी गोत कर
जिन्हें बारह घण्टे करना होता है काम
दरिद्रता के कोख-जाये बेटे
लक्ष्मी की अमरबेल
जिनकी खिच्ची उँगलियों से
लिपटती है
दो आँखों की चाबुक
उनकी झुकी पीठ पर
निगरानी रखती है
घुटनों पर ही नहीं , आत्मा पर घावों वाले
रिसते घावों वाले
वे बच्चे
रिश्तेदार बताये जाते हैं
नजदीकी रिश्तेदार
दूर गाँव के अपने-सगे
और देखते रह जाते हैं ठगे
प्रशासक और न्यायाधीश
नियम-अधिनियम के नट-बोल्टू
कसने का [...]

April 10, 2008

जुगनू : अल्लामा इक़बाल की बाल कविता

सुनाऊं तुम्हे बात एक रात की,
कि वो रात अन्धेरी थी बरसात की,
चमकने से जुगनु के था इक समा,
हवा में उडें जैसे चिनगारियां.
पडी  एक बच्चे की उस पर नज़र ,
पकड़ ही लिया एक को दौड़ कर.
चमकदार कीडा जो भाया उसे ,
तो टोपी में झटपट छुपाया उसे.
तो ग़मग़ीन कैदी ने की इल्तेज़ा ,
‘ओ नन्हे शिकारी ,मुझे कर [...]

April 3, 2008

यह मुरझाया हुआ फूल है

यह मुरझाया हुआ फूल है,
इसका हृदय दुखाना मत ।
स्वयं बिखरने वाली इसकी,
पंखुड़ियाँ बिखराना मत ॥

गुजरो अगर पास से इसके,
इसे चोट पहुँचाना मत ।
जीवन की अन्तिम घड़ियों में,
देखो,इसे रुलाना मत ॥

अगर हो सके तो,
दो ठंडी बूँदें टपका देना,प्यारे ।
जल न जाए संतप्त हृदय,
शीतलता ला देना प्यारे ॥
- सुभद्रा कुमारी चौहान