बेतरतीब आवरगी

img_0149.jpgimg_0148.jpgimg_0148.jpgimg_0147.jpgइस बगीचे की क्यारियों में इस बार एक गजब की बेतरतीब आवरगी पसरी हुई है । ‘अंतर्गृही - यात्रा’ कर रही महिलाएं चन्दन शहीद और आदि केशव के बीच वरुणा-गंगा के संगम की रेत पर जैसे अपनी चटक रंगों की साड़ियाँ दूर-दूर तक फैला देती हैं ।

    यह छोटी कलमी ‘आम्रपाली’ भी पहली बार यूँ बौराई है ।

4 Responses to “बेतरतीब आवरगी”


  1. 1 ghughutibasuti March 13, 2008 at 1:43 pm

    इसी को नैसर्गिक सौन्दर्य कहते हैं । स्वास्थ्य लाभ के लिए इससे सुन्दर और सही जगह कौन सी हो सकती है !
    घुघूती बासूती

  2. 2 अनिल रघुराज March 13, 2008 at 3:33 pm

    काश ऐसे बगीचों के आसपास रहने का आनंद मिल पाता!!!

  3. 3 ajaykumarjha March 13, 2008 at 3:42 pm

    kya baat hai sir , aapkee post ne to hamare jeevan mein hariyaalee aur rangeeniyon ko badhaa diya.

  4. 4 आभा March 13, 2008 at 11:59 pm

    ऐसी फुलवारी देख देख कर जल्दी से जल्दी स्वस्थ्य हो जाइए ….मंगलकामनाएं।


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