रजी चन्द्रशेखर ने मेरे चिट्ठे पर टिप्पणी दे कर सूचित किया कि उन्होंने वर्डप्रेस पर एक हिन्दी-कम-मलयालम ज्यादा चिट्ठा शुरु किया है । रवि रतलामीजी ने उन्हें हिन्दी चिट्ठे को अलग रखने की सलाह दी है । रजी चन्द्रशेखर सलाह मानें या न माने हिन्दी चिट्ठा-पाठक उनका स्वागत करें । रजी भाई आप से पहले दो मलयाली भाषी लोगों के हिन्दी चिट्ठे रहे हैं ( डॉ. बेजी जेसन तथा खेती किसानी पर लिखने वाले पूर्व सैनिक चन्द्रशेखरन नायर के )। इन चिट्ठों के द्वारा हिन्दी और मलयालम के पाठकों को लाभ हो , यह कामना है । चिट्ठा - चर्चा में मलयालम चिट्ठों पर एक आलेख मैंने लिखा था ।
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धन्यवद जी,
केरल के और इधर के साहित्य के बरे में कुछ न कुछ लिखने की कोशिश ज़रूर करुँगा ।
हिन्दी और मलयाली दोंनों चिट्ठों का स्वागत है.
अतुल
मैत्री
रजि चन्द्रशेखर को मैं भी बताते रहूँगा कि आप हिन्दी चिट्ठों अलग ही रखे।
राजी जी
आप के चिठ्ठे का स्वागत है, बहुत ही आदरणीय प्रयास है।