Archive for September, 2007

आइए ‘आत्मदर्शी’ का खैरम - कदम करें

मेरे एक कथाकार मित्र ने ‘आत्मदर्शी’ नाम से चिट्ठा शुरु किया है।साहित्यिक जगत में वे एक अन्य नाम से कहानी-कविता लिखते रहे हैं ।ओड़ीसा के ढेंकानाल में शिक्षक हैं । आप सभी साथियों से निवेदन है कि उनके चिट्ठे को देखें,पढ़ें और स्वागत करें।

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चिट्ठाजगत अपनाने के लिए(न देखें)


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

जुगनू : अल्लामा इक़बाल की बाल कविता

सुनाऊं तुम्हे बात एक रात की,

कि वो रात अन्धेरी थी बरसात की,

चमकने से जुगनु के था इक समाँ ,

हवा में उड़ें जैसे चिनगारियां ।

पड़ी  एक बच्चे की उस पर नज़र ,

पकड़ ही लिया एक को दौड़ कर ।

चमकदार कीड़ा जो भाया उसे ,

तो टोपी में झटपट छुपाया उसे ।

तो ग़मग़ीन कैदी ने की इल्तज़ा ,

‘ओ छोटा शिकारी ,मुझे कर रिहा ।

ख़ुदा के लिए छोड़ दे ,छोड़ दे ,

मेरे कैद के जाल को तोड दे ।’

-”करूंगा न आज़ाद उस वक्त तक ,

कि देखूं न दिन में तेरी मैं चमक ।”

-”चमक मेरी दिन में न पाओगे तुम ,

उजाले में वो तो हो जाएगी गुम ।

न अल्हड़पने से बनो पायमाल -

समझ कर चलो- आदमी की सी चाल” ।

-अल्लामा इक़बाल ।

अतुल कुमार का स्वागत करें

    मुजफ़्फ़रपुर के मनिका गाँव के रहने वाले अतुल कुमार ने चिट्ठा शुरु किया है । प्रख्यात समाजवादी चिन्तक सच्चिदानन्द सिन्हा का गाँव भी मनिका है और अतुल को उनके निकट सम्पर्क का अवसर मिला । सामाजिक - राजनैतिक मसलों को परखने की एक पैनी दृष्टि मिली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की शोधवृत्ति प्राप्त कर अतुल ने काशी विश्वविद्यालय के प्राकृत विभाग से डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की।

    चर्चित पत्रिका ‘सामयिक वार्ता’ के प्रकाशन-सम्पादन से अतुल लम्बे समय तक जुड़े रहे है।पिछले कुछ बरसों से सक्रिय अखबारनवीसी से अतुल जुड़े हैं।

    पिछले ३१ अगस्त से अतुल ने ‘मैत्री’ नामक चिट्ठा शुरु किया है । चिट्ठेकार मित्रों से निवेदन है कि ‘मैत्री’ के प्रति मैत्री प्रकट करें ।

   अतुल से निवेदन है कि वे टिप्पणियाँ देवनागरी में लिखी हिन्दी में किया करें।


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