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	<title>Comments on: &#8216;शैशव&#8217; पर अतिक्रमण और शैशव की ताकत</title>
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	<description>बचपन</description>
	<pubDate>Sun, 27 Jul 2008 05:08:03 +0000</pubDate>
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		<title>By: ghughutibasuti</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2007/08/14/shaishavreviewpost-index/#comment-218</link>
		<dc:creator>ghughutibasuti</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Aug 2007 19:36:41 +0000</pubDate>
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		<description>इस अद्भुत श्रृंखला बापू की गोद में को पढ़ते समय लगा कि मैं किसी और ही संसार में चली गयी हूँ । मेरे कुछ सुझाव हैं ...
१ विभिन्न पात्रों की एक सूची बनाकर उनका परिचय भी दीजिये ।
२ यदि हो सके तो फोटो भी दीजिये ।
 मुझे बहुत और पढ़ना है, तब और कुछ कह पाऊँगी ।  अभी तो मैं आपके पिताजी के शैशव में ही हूँ । दो अध्याय बा पर भी पढ़े । एक बार आप स्वयं देखकर बताइये कि क्या सब अध्यायों के एक के बाद एक आने का कुछ साधन हो सकता है या क्या मैं ही गल्ती कर रही हूँ और कुछ आगे पीछे पढ़ रही हूँ ।
स्वतंत्रता संग्राम के इन महा नायकों से हमारी जान पहचान करवाने के लिए धन्यवाद । अब तक जो पढ़ती थी वह इतिहास सा लगता था किन्तु ये वर्णन जीवंत लगता है और कुछ देर के लिए भूल जाती हूँ कि यह बहुत पुराने समय की बात है । इस लेखन को पढ़कर गाँधी जी कुछ और मानवीय लगने लगे 
हैं । 
हो सके तो नारायण देसाई जी की लिखी पुस्तकों की एक सूची भी दें और वे किस किस भाषा में उपलब्ध हैं भी बताइये ।
कुछ कविताओं के प्रिन्ट आउट्स ले लिए हैं । जितनी अधिक बाल्य कविताएँ यहाँ डाल सकें उतना ही अच्छा लगेगा ।
घुघूती बासूती</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>इस अद्भुत श्रृंखला बापू की गोद में को पढ़ते समय लगा कि मैं किसी और ही संसार में चली गयी हूँ । मेरे कुछ सुझाव हैं &#8230;<br />
१ विभिन्न पात्रों की एक सूची बनाकर उनका परिचय भी दीजिये ।<br />
२ यदि हो सके तो फोटो भी दीजिये ।<br />
 मुझे बहुत और पढ़ना है, तब और कुछ कह पाऊँगी ।  अभी तो मैं आपके पिताजी के शैशव में ही हूँ । दो अध्याय बा पर भी पढ़े । एक बार आप स्वयं देखकर बताइये कि क्या सब अध्यायों के एक के बाद एक आने का कुछ साधन हो सकता है या क्या मैं ही गल्ती कर रही हूँ और कुछ आगे पीछे पढ़ रही हूँ ।<br />
स्वतंत्रता संग्राम के इन महा नायकों से हमारी जान पहचान करवाने के लिए धन्यवाद । अब तक जो पढ़ती थी वह इतिहास सा लगता था किन्तु ये वर्णन जीवंत लगता है और कुछ देर के लिए भूल जाती हूँ कि यह बहुत पुराने समय की बात है । इस लेखन को पढ़कर गाँधी जी कुछ और मानवीय लगने लगे<br />
हैं ।<br />
हो सके तो नारायण देसाई जी की लिखी पुस्तकों की एक सूची भी दें और वे किस किस भाषा में उपलब्ध हैं भी बताइये ।<br />
कुछ कविताओं के प्रिन्ट आउट्स ले लिए हैं । जितनी अधिक बाल्य कविताएँ यहाँ डाल सकें उतना ही अच्छा लगेगा ।<br />
घुघूती बासूती</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: अभय तिवारी</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2007/08/14/shaishavreviewpost-index/#comment-217</link>
		<dc:creator>अभय तिवारी</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Aug 2007 15:41:41 +0000</pubDate>
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		<description>बड़े हो जाओ का आशीर्वाद कैसे दे दूँ..ये तो उल्टा शैशव का अस्तित्व मिटाने वाला शाप हो जाएगा..बने रहो कैसा रहेगा.. मगर लिखने वाले की बुज़ुर्गियत का मामला फिर भी नहीं सुलझता.. तो बधाई ही ले लीजिये..वही सुरक्षित राह है.. बधाई..!!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बड़े हो जाओ का आशीर्वाद कैसे दे दूँ..ये तो उल्टा शैशव का अस्तित्व मिटाने वाला शाप हो जाएगा..बने रहो कैसा रहेगा.. मगर लिखने वाले की बुज़ुर्गियत का मामला फिर भी नहीं सुलझता.. तो बधाई ही ले लीजिये..वही सुरक्षित राह है.. बधाई..!!</p>
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		<title>By: श्रीश शर्मा</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2007/08/14/shaishavreviewpost-index/#comment-216</link>
		<dc:creator>श्रीश शर्मा</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Aug 2007 11:42:11 +0000</pubDate>
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		<description>आपके संस्मरण जानना रुचिकर रहा।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आपके संस्मरण जानना रुचिकर रहा।</p>
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		<title>By: नीरज दीवान</title>
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		<dc:creator>नीरज दीवान</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Aug 2007 10:56:36 +0000</pubDate>
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		<description>:)</description>
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		<title>By: प्रियंकर</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2007/08/14/shaishavreviewpost-index/#comment-214</link>
		<dc:creator>प्रियंकर</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Aug 2007 10:26:59 +0000</pubDate>
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		<description>हिंदी समाज में बच्चों की उपेक्षा का ही एक रूप है हिंदी में अपेक्षित मात्रा में  बाल और किशोर साहित्य न होना . बांग्ला में तो कोई बड़ा लेखक कहला ही नहीं सकता अगर उसने प्रचुर मात्रा में बाल और किशोर साहित्य न रचा हो .

अतिक्रमण के बावजूद 'शैशव' में पर्याप्त मात्रा में बाल/किशोरोपयोगी सामग्री है जो उन्हें लॉलीपॉप साहित्य से अलग, अपने समय और समाज से जोड़ने का ज़रूरी काम करेगी . खास तौर पर नारायण भाई देसाई की 'बापू की गोद में' सीरीज़ तो बहुत ही प्रेरक और आवश्यक पाठ्य सामग्री है .

एक रिक्त स्थान को भरने के सार्थक प्रयास के लिए और इस खाली स्थान को बच्चों की रिहाइश के अनुकूल स्थान बनाने के लिए हार्दिक बधाई!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हिंदी समाज में बच्चों की उपेक्षा का ही एक रूप है हिंदी में अपेक्षित मात्रा में  बाल और किशोर साहित्य न होना . बांग्ला में तो कोई बड़ा लेखक कहला ही नहीं सकता अगर उसने प्रचुर मात्रा में बाल और किशोर साहित्य न रचा हो .</p>
<p>अतिक्रमण के बावजूद &#8216;शैशव&#8217; में पर्याप्त मात्रा में बाल/किशोरोपयोगी सामग्री है जो उन्हें लॉलीपॉप साहित्य से अलग, अपने समय और समाज से जोड़ने का ज़रूरी काम करेगी . खास तौर पर नारायण भाई देसाई की &#8216;बापू की गोद में&#8217; सीरीज़ तो बहुत ही प्रेरक और आवश्यक पाठ्य सामग्री है .</p>
<p>एक रिक्त स्थान को भरने के सार्थक प्रयास के लिए और इस खाली स्थान को बच्चों की रिहाइश के अनुकूल स्थान बनाने के लिए हार्दिक बधाई!</p>
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		<title>By: उन्मुक्त</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2007/08/14/shaishavreviewpost-index/#comment-213</link>
		<dc:creator>उन्मुक्त</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Aug 2007 07:48:31 +0000</pubDate>
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		<description>साल पूरा करने पर बधाई</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>साल पूरा करने पर बधाई</p>
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		<title>By: Shastri JC Philip</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2007/08/14/shaishavreviewpost-index/#comment-212</link>
		<dc:creator>Shastri JC Philip</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Aug 2007 14:33:55 +0000</pubDate>
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		<description>कृ्पया इस सूची को बगलपट्टी पर या "परिचय" मे डाल कर इसे स्थाई बना दें जिससे नये पाठकों को भी ये लेख दिख जायें  -- शास्त्री जे सी फिलिप

हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
http://www.Sarathi.info</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>कृ्पया इस सूची को बगलपट्टी पर या &#8220;परिचय&#8221; मे डाल कर इसे स्थाई बना दें जिससे नये पाठकों को भी ये लेख दिख जायें  &#8212; शास्त्री जे सी फिलिप</p>
<p>हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है<br />
<a href="http://www.Sarathi.info" rel="nofollow">http://www.Sarathi.info</a></p>
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