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निडरता तो कोई उनसे सीखे| ठाणा से कल्याण जाते समय खाड़ी पार करते ही
पारसीक की पहाड़ियों में एक बड़ी सुरंग आती है। ‘थ्रू’ गाड़ी इस सूरंग से तथा
लोकल ट्रेन पुराने रास्ते से खाड़ी के किनारे से सट कर पहाड़ी का चक्कर लगा
कर जातीं । लोकल [...]
Entries from August 2007
August 27, 2007
मवालियों से भिडन्त : स्वामी आनन्द
August 24, 2007
"बाम्मन को बैल की तरह जोतवाने का हुक्म ‘महात्मा’ से दिला दें": छोटुभाई (५) : स्वामी आनन्द
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पिछली कड़ियाँ : एक , दो , तीन , चार
११.
छोटुभाई को पाठशाला चलाने, सहकारी सोसायटी खड़ा करने या आवेदन पत्र लिखने जैसे ‘रचनात्मक’ कामों में कोई ‘रुचि’ न थी। जुल्म और अन्याय को शिकारी कुत्ते की तरह ढूँढ़ निकाल कर उनके खिलाफ लड़ना और लोगों के [...]
August 22, 2007
छोटुभाई : आदिवासी सेवा-९ : स्वामी आनन्द
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ठाणा जिला यानि दमणगंगा से वसई की खाड़ी तक , दक्षिण गुजरात के घुटने
से ले कर पैर तक का अरब सागर और सह्याद्री की दीवार के बीच का इलाका।
पहाड़, समुद्र , खाड़ी और घने जंगल से भरा हुआ। चालीस प्रतिशत जनसंख्या वारली
काथोडी एवं अन्य आदिवासी जातियों की। इन आदिवासियों [...]
August 18, 2007
रेलवे पुराण – 3 , स्वामी आनन्द
पिछले भाग ; एक तथा दो
६
इसी इज्जत-आदर के कारण और बरसों की उनकी लगन से हार कर अन्ततः रेलवे के सत्ताधीशों ने उनके लिए कोई स्वतंत्र काम खड़ा करने का सोचा जहां रोज चल कर ऊपरी अधिकारियों को उनसे टकराना न पड़े और फिर भी रेल विभाग को उनकी बुद्धिमत्ता का पूरा लाभ भी मिल [...]
August 14, 2007
‘शैशव’ पर अतिक्रमण और शैशव की ताकत
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दुनिया के बच्चों से इस चिट्ठे पर पहले भी माफी माँगी है । ‘शैशव’ पर अक्सर बड़े बच्चों और छोटी जवानी द्वारा अतिक्रमण हुआ । सरासर गुण्डई ! गुण्डा यानी जो कमजोर को सताये लेकिन मजबूत के पाँव चाटे । बताइए, अन्य दो चिट्ठों पर बचपन [...]
August 13, 2007
रेल – पुराण (२) : स्वामी आनन्द
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पिछले प्रसंग से आगे :
उन्हीं दिनों ठेकेदार ने अपने बाप के गांव में बगीचे में खाद के लिए वैगन भर कर बकरी की लीद पारडी भेजी । रेलवे रसीद में ८० मन लिखवा कर उतने ही वजन का भाड़ा दिया [...]
August 10, 2007
महादेव से बड़े : ले. स्वामी आनन्द
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[ स्वामी आनन्द गुजराती गद्य - साहित्य के एक प्रबल हस्ताक्षर माने जाते हैं । वे महात्मा गाँधी और सरदार पटेल के निकट सहयोगी थे और गाँधीजी की पत्रिकाओं के उस दौर में प्रकाशक थे जब अँग्रेज हुकूमत का दमनचक्र चल रहा था । उनकी सशक्त और अनूठी [...]
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