गूगल ने कर दिया मण्ठा

बुझौव्वल की सोर में मण्ठा डाल दिया गूगल ने । शहरी पाठकों को बताना पड़ेगा कि सोर कहते हैं जड़ को और यह किंवदन्ती है कि पौधे की जड़ में मठ्ठा या मण्ठा डाल देने पर वह जल जाता है,उसका नाश हो जाता है। भाग लेने वाले तीन मित्रों ने खुद बताया कि गूगल से उन्हें जवाब देने में मदद मिली । जिन्होंने ने सहारा नहीं लिया या सहारा लेने की सोच ही न पाए उन्हें यह लगना लाजमी है कि उनके साथ नाइंसाफी हुई । दरअसल प्रश्नकर्ता को अपना कौशल इसमें दिखाना था कि उसके सवाल मशीन से उगलवाना सहज न हो।जिन्होंने गूगल से मदद ली उन्होंने अनुचित नहीं किया ।

    १११ लोगों ने बुजौव्वल को देखा , ८ ने जवाब दिए , कुछ ने सवाल कठिन होने की शिकायत की । परिणाम :

    प्रथम स्थान : जीतू उर्फ़ जीतेन्द्र चौधरी , धुरविरोधी उर्फ … , v9y उर्फ विनय जैन तथा अभिषेक ओझा

    द्वितीय स्थान : सागर चन्द नाहर

    तृतीय स्थान : नितिन बागला तथा प्रमेन्द्र कुमार सिंह

    चतुर्थ स्थान : अन्नपूर्णा

   कुछ भागीदार वरिष्ठ साथियों ने चेताया है कि पुरस्कार भेजो वर्ना भाग नहीं लेंगे ! विविध – भारती को काएदे से पुरस्कार प्रायोजित करने चाहिए स्वर्ण जयन्ती वर्ष के मद्दे नज़र ।

    सभी प्रतिभागियों के उत्तर अतिशीघ्र मूल प्रवि्ष्टी की टिप्पणियों में देखे जा सकेंगे,यहाँ

3 Responses to “गूगल ने कर दिया मण्ठा”


  1. 1 रवि June 5, 2007 at 4:31 pm

    “…पौधे की जड़ में मठ्ठा या मण्ठा डाल देने पर वह जल जाता है,उसका नाश हो जाता है।…”

    परंतु सभी पौधों में नहीं. उदाहरण के लिए, करी पत्ते के पौधे में ज्यादा पत्ते और ज्यादा सुगंधित पत्ते प्राप्त करने के लिए उसकी जड़ में मठ्ठा डाला जाता है.

    दरअसल, घास की जड़ में मठ्ठा डालकर घास को जलाने की किंवदन्ती है. परंतु संभवतः यह भी पूरा सच नहीं है.

  2. 2 yunus June 5, 2007 at 6:31 pm

    विविध भारती को पुरस्‍कार भेजने चाहिये स्‍वर्ण जयंती पर । सही कहा जी सही कहा । हा हा हा हा । अच्‍छा अब ये बताईये कि अगली कड़ी कब प्रस्‍तुत कर रहे हैं, जिसमें गूगल ना कर पाये बंटाधार—इतनी तेज़ हो हमारे सवालों की धार । गूगल की गूगली हो जाये बेकार । और तब सामने आयेगा असली कलाकार । फिल्‍हाल नमस्‍कार ।

  3. 3 PRAMENDRA PRATAP SINGH June 5, 2007 at 9:55 pm

    आयोजन कर्ता एवं विजेताओं को बधाई

    प्रमेन्द्र कुमार सिंह की जगह प्रमेन्द्र प्रताप सिंह पढ़ा जायें :)


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