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	<title>Comments on: विविध भारती के श्रोताओं के लिए एक बुझौव्वल</title>
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	<pubDate>Wed, 14 May 2008 09:13:11 +0000</pubDate>
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		<title>By: सागर चन्द नाहर</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2007/05/22/vividh-bharati-quiz/#comment-88</link>
		<dc:creator>सागर चन्द नाहर</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 27 May 2007 06:59:08 +0000</pubDate>
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		<description>पहले गाने का उत्तर है  &lt;b&gt; दौ नैना मतवारे&lt;/b&gt;  यह गाना स्व. कुन्दन लाल सहगल ने गाया था 
दौ नैना मतवारे हम पर जुलम करें
......
तन तन के चलायें तीर 
नस नस में  उठायें पीर 
मद भरे रसीले निठुर बड़े 
...
क्या मैं सही हूँ?</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पहले गाने का उत्तर है  <b> दौ नैना मतवारे</b>  यह गाना स्व. कुन्दन लाल सहगल ने गाया था<br />
दौ नैना मतवारे हम पर जुलम करें<br />
&#8230;&#8230;<br />
तन तन के चलायें तीर<br />
नस नस में  उठायें पीर<br />
मद भरे रसीले निठुर बड़े<br />
&#8230;<br />
क्या मैं सही हूँ?</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: अभय तिवारी</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2007/05/22/vividh-bharati-quiz/#comment-87</link>
		<dc:creator>अभय तिवारी</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 May 2007 03:39:23 +0000</pubDate>
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		<description>१. ओ छिपने वाले सामने आ..
२. धीरे से जाना बगियन में..
३.  कब लोगो खबर मोरे राम..
४. सफल होगी रे तेरी आराधना.. 
५. जब दिल से दिल टकराता है..</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>१. ओ छिपने वाले सामने आ..<br />
२. धीरे से जाना बगियन में..<br />
३.  कब लोगो खबर मोरे राम..<br />
४. सफल होगी रे तेरी आराधना..<br />
५. जब दिल से दिल टकराता है..</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: daskabir</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2007/05/22/vividh-bharati-quiz/#comment-86</link>
		<dc:creator>daskabir</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 May 2007 08:37:51 +0000</pubDate>
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		<description>यूनुस भाई,  आप एकदम सही कह रहे हैं.  
 पहले घटिया गाने भी होते थे और आज भी अच्छे गीत होते हैं. 
संगीत के धरम की बात इसलिये कि आज सुबह ब्लाग्स पर कुछ पढ़ लिया था, अफलातून साहब के सवालों ने दिल गुदगुदाया मुझे भी सो बेआख्ता मुंह से आह निकल गयी कि संगीत ही धरम होता तो भला था.  
चलिये हम और आप अब एक ही मजहब के ही हैं.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>यूनुस भाई,  आप एकदम सही कह रहे हैं.<br />
 पहले घटिया गाने भी होते थे और आज भी अच्छे गीत होते हैं.<br />
संगीत के धरम की बात इसलिये कि आज सुबह ब्लाग्स पर कुछ पढ़ लिया था, अफलातून साहब के सवालों ने दिल गुदगुदाया मुझे भी सो बेआख्ता मुंह से आह निकल गयी कि संगीत ही धरम होता तो भला था.<br />
चलिये हम और आप अब एक ही मजहब के ही हैं.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: yunus</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2007/05/22/vividh-bharati-quiz/#comment-85</link>
		<dc:creator>yunus</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 May 2007 07:48:56 +0000</pubDate>
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		<description>धुरविरोधी जी, नई पीढ़ी से मेरा मतलब उस पीढ़ी से है जिसके आराध्‍य हिमेश रेशमिया हैं,  उन्‍हें नौशाद और उनके समकालीनों की पीढ़ी का संगीत ‘बोर’ लगता है, ये मुझसे कई बच्‍चों ने कहा है, वैसे तो मैं भी नई पीढ़ी का ही हूं, चौंतीस बरस की उम्र पुरानी पीढ़ी वाली तो नहीं है ना । रही बात संगीत के धर्म होने की । तो भईया अपना तो धर्म ही संगीत है । वो भी अच्‍छा संगीत, चाहे नया हो या पुराना । हम उन लोगों में से नहीं जो आज के संगीत को गाली देकर खुद को विद्वान साबित करें । बहरहाल आपकी ये बात सही है कि हम सबका धर्म संगीत होता तो कितना अच्‍छा होता</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>धुरविरोधी जी, नई पीढ़ी से मेरा मतलब उस पीढ़ी से है जिसके आराध्‍य हिमेश रेशमिया हैं,  उन्‍हें नौशाद और उनके समकालीनों की पीढ़ी का संगीत ‘बोर’ लगता है, ये मुझसे कई बच्‍चों ने कहा है, वैसे तो मैं भी नई पीढ़ी का ही हूं, चौंतीस बरस की उम्र पुरानी पीढ़ी वाली तो नहीं है ना । रही बात संगीत के धर्म होने की । तो भईया अपना तो धर्म ही संगीत है । वो भी अच्‍छा संगीत, चाहे नया हो या पुराना । हम उन लोगों में से नहीं जो आज के संगीत को गाली देकर खुद को विद्वान साबित करें । बहरहाल आपकी ये बात सही है कि हम सबका धर्म संगीत होता तो कितना अच्‍छा होता</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: dhurvirodhi</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2007/05/22/vividh-bharati-quiz/#comment-84</link>
		<dc:creator>dhurvirodhi</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 May 2007 02:09:17 +0000</pubDate>
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		<description>यूनुस जी, हम भी नई नकोर पीढ़ी के हैं, पर संगीत तो पीढ़ी दर पीढ़ी नया ही रहता है ना!, 

और संगीत को जात धरम भी नहीं बांट सकता.  
फिल्मी दुनियां का सबसे मकबूल भजन "ओ दुनियां के रखवाले" और "मन तड़पत हरि दरशन को आज" को रचने वाले सभी रसखान थे.  संगीत नौशाद, गायक रफी और गीतकार शकील बदायूंनी.  

काश सारी दुनियां का धरम संगीत ही होता.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>यूनुस जी, हम भी नई नकोर पीढ़ी के हैं, पर संगीत तो पीढ़ी दर पीढ़ी नया ही रहता है ना!, </p>
<p>और संगीत को जात धरम भी नहीं बांट सकता.<br />
फिल्मी दुनियां का सबसे मकबूल भजन &#8220;ओ दुनियां के रखवाले&#8221; और &#8220;मन तड़पत हरि दरशन को आज&#8221; को रचने वाले सभी रसखान थे.  संगीत नौशाद, गायक रफी और गीतकार शकील बदायूंनी.  </p>
<p>काश सारी दुनियां का धरम संगीत ही होता.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: dhurvirodhi</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2007/05/22/vividh-bharati-quiz/#comment-83</link>
		<dc:creator>dhurvirodhi</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 May 2007 00:27:59 +0000</pubDate>
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		<description>अरे अफलातून जी;  बड़ी मजेदार प्रतियोगिता है.  शुक्र है आपका कि हमें इस बन्दिश से बाहर रखा है. चलिये लीजिये अपने जबाब,

1. तन - तन कर तीर चला कर नसों में पीर ऊठाने वाले कौन हैं ?
तन तन के चलायें तीर, नस नस में उठायें पीर, 
मदभरे नशीले निठुर बढ़े, दो नयना मतवारे तिहारे, 
हम पर जुलुम करे.
माय सिस्टर संगीत पंकज मल्लिक, गायक - कुंदन लाल सहगल

1. चमेली कहाँ से आई थी ?
अपकी मालिनिया चमेली तो बीकानेर से आयी थी, (इसके अलावा बासुचटर्जी की चमेली मेरठ में रहती थी.) 
राजा और रंक, संगीत- लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल  गायक- लता मंगेशकर

3. ‘ मेरे राम !’ तुम्हारी शरण में आकर मुझे कैसा सुख मिला है ?
सूरज की गरमी से तपते हुये तन को मिल जाये तरुवर की छाया.
वैसे आजकल तो राम की शरण से अधिक ठंडी एसी की शरण है.
गैर फिल्मी भजन इस को शर्मा बन्धु - पंडित गोपाल शर्मा, सुखदेव शर्मा, कौशलेन्द्र शर्मा एवं राघवेन्द्र शर्मा ने गाया था.


4. जिन्दगी कब सफल हो जाएगी ?
तु जो मेरे सुर में, सुर मिलाले, संग गाले, तो जिंदगी हो जाये सफल
चितचोर - गीत- संगीत रवीन्द्र जैन  गायक येसुदास - हेमलता

5. आकाश कब जमीन हो जाता है ?
जब तारे जमीं पर चलते है, आकाश ज़मीं हो जाता है, उस रात को चांद नहीं जाता, वो चांद यहीं सो जाता है
पल भर के लिये इन आखों में अपना बेगाना ढूढते है, आबोदाना ढूढते है, इक आशियाना ढूढते हैं, दो दिवाने 
घरोंदा, गीत गुलजार, संगीत जयदेव. गायक भूपेन्द्र - रूना लैला

कुछ मुद्राओं की भी व्यवस्था है क्या?</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अरे अफलातून जी;  बड़ी मजेदार प्रतियोगिता है.  शुक्र है आपका कि हमें इस बन्दिश से बाहर रखा है. चलिये लीजिये अपने जबाब,</p>
<p>1. तन - तन कर तीर चला कर नसों में पीर ऊठाने वाले कौन हैं ?<br />
तन तन के चलायें तीर, नस नस में उठायें पीर,<br />
मदभरे नशीले निठुर बढ़े, दो नयना मतवारे तिहारे,<br />
हम पर जुलुम करे.<br />
माय सिस्टर संगीत पंकज मल्लिक, गायक - कुंदन लाल सहगल</p>
<p>1. चमेली कहाँ से आई थी ?<br />
अपकी मालिनिया चमेली तो बीकानेर से आयी थी, (इसके अलावा बासुचटर्जी की चमेली मेरठ में रहती थी.)<br />
राजा और रंक, संगीत- लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल  गायक- लता मंगेशकर</p>
<p>3. ‘ मेरे राम !’ तुम्हारी शरण में आकर मुझे कैसा सुख मिला है ?<br />
सूरज की गरमी से तपते हुये तन को मिल जाये तरुवर की छाया.<br />
वैसे आजकल तो राम की शरण से अधिक ठंडी एसी की शरण है.<br />
गैर फिल्मी भजन इस को शर्मा बन्धु - पंडित गोपाल शर्मा, सुखदेव शर्मा, कौशलेन्द्र शर्मा एवं राघवेन्द्र शर्मा ने गाया था.</p>
<p>4. जिन्दगी कब सफल हो जाएगी ?<br />
तु जो मेरे सुर में, सुर मिलाले, संग गाले, तो जिंदगी हो जाये सफल<br />
चितचोर - गीत- संगीत रवीन्द्र जैन  गायक येसुदास - हेमलता</p>
<p>5. आकाश कब जमीन हो जाता है ?<br />
जब तारे जमीं पर चलते है, आकाश ज़मीं हो जाता है, उस रात को चांद नहीं जाता, वो चांद यहीं सो जाता है<br />
पल भर के लिये इन आखों में अपना बेगाना ढूढते है, आबोदाना ढूढते है, इक आशियाना ढूढते हैं, दो दिवाने<br />
घरोंदा, गीत गुलजार, संगीत जयदेव. गायक भूपेन्द्र - रूना लैला</p>
<p>कुछ मुद्राओं की भी व्यवस्था है क्या?</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: RC Mishra</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2007/05/22/vividh-bharati-quiz/#comment-82</link>
		<dc:creator>RC Mishra</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 May 2007 20:32:50 +0000</pubDate>
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		<description>प्रश्न क्रमांक २. का उत्तर है ‘बीकीनेर’
४. का ‘तू जो मेरे सुर मे, सुर मिला दे, संग गा दे’</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>प्रश्न क्रमांक २. का उत्तर है ‘बीकीनेर’<br />
४. का ‘तू जो मेरे सुर मे, सुर मिला दे, संग गा दे’</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: निशांत</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2007/05/22/vividh-bharati-quiz/#comment-81</link>
		<dc:creator>निशांत</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 May 2007 18:02:21 +0000</pubDate>
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		<description>१. शम्मी कपूर - लाल छड़ी मैदान खड़ी
२. चमेली बीकानेर से आयी थी - मेरा नाम है चमेली, मैं हूँ मालन अलबेली
३. शर्मा बन्धु - जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाए तरुवर की छाया
४. ...
५. ...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>१. शम्मी कपूर - लाल छड़ी मैदान खड़ी<br />
२. चमेली बीकानेर से आयी थी - मेरा नाम है चमेली, मैं हूँ मालन अलबेली<br />
३. शर्मा बन्धु - जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाए तरुवर की छाया<br />
४. &#8230;<br />
५. &#8230;</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: मनीष</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2007/05/22/vividh-bharati-quiz/#comment-80</link>
		<dc:creator>मनीष</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 May 2007 17:24:20 +0000</pubDate>
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		<description>और हाँ पहला सवाल जरा मुश्किल था guess कर रहा हूँ not sure
१ लाल छड़ी मैदान खड़ी, क्या खूब लड़ी....
तन तन कर जालिम ने अपना तीर निशाने पर मारा
है शुक्र कि अब तक जिंदा हूँ
मैं दिल का घायल बेचारा....</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>और हाँ पहला सवाल जरा मुश्किल था guess कर रहा हूँ not sure<br />
१ लाल छड़ी मैदान खड़ी, क्या खूब लड़ी&#8230;.<br />
तन तन कर जालिम ने अपना तीर निशाने पर मारा<br />
है शुक्र कि अब तक जिंदा हूँ<br />
मैं दिल का घायल बेचारा&#8230;.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: मनीष</title>
		<link>http://shaishav.wordpress.com/2007/05/22/vividh-bharati-quiz/#comment-79</link>
		<dc:creator>मनीष</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 May 2007 17:09:28 +0000</pubDate>
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		<description>विविध भारती तो खैर अबनहीं सुनता पर आपके ४ प्रश्नों के जवाब तो मजे में दे सकता हूँ ;)

2 चमेली बीकानेर से आई थी :) गीत मेरा नाम है चमेली

3 सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाए तरुवर की छाया, ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला ।।शरण तेरी आया 

4 तू जो मेरे सुर में सुर मिलाए संग गाए तो जिंदगी हो जाए सफल

5 जब तारे जमीं पर चलते हैं आकाश जमीं हो जाता है</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>विविध भारती तो खैर अबनहीं सुनता पर आपके ४ प्रश्नों के जवाब तो मजे में दे सकता हूँ ;)</p>
<p>2 चमेली बीकानेर से आई थी :) गीत मेरा नाम है चमेली</p>
<p>3 सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाए तरुवर की छाया, ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला ।।शरण तेरी आया </p>
<p>4 तू जो मेरे सुर में सुर मिलाए संग गाए तो जिंदगी हो जाए सफल</p>
<p>5 जब तारे जमीं पर चलते हैं आकाश जमीं हो जाता है</p>
]]></content:encoded>
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