मेरी बगिया

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लंगडा

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अमरूद पर रॉबिन

  मधुमालती

 

महुआ (१ माह पूर्व )

   सफ़ेद लिली

   लंगडा

11 Responses to “मेरी बगिया”


  1. 1 anamdas May 10, 2007 at 6:41 pm

    बहुत भाग्यवान हैं आप, अगर आपके घर में ये पेड़ हैं, हम फ्लैट में रहने वाले हैं, इनका सुख क्या जाने, मेरा बचपन ऐसी ही बगिया में बीता है, इसका सुख मैं जानता हूँ.

  2. 2 arun May 10, 2007 at 7:12 pm

    बाकी आप रख लो लंगडे से हमे बडी हमदर्दी है उसे हमारे पास भीजवादे

  3. 3 sunita(shanoo) May 10, 2007 at 7:45 pm

    वाह ! क्या बगीया है,..आपने तो हमारे मन की बात कर दी अपनी बगीया में सैर भी करने देंगे की नही,..वैसे बहुत पसंद है हमे पेड़-पौधे। दर्शन के लिये धन्यवाद।
    सुनीता(शानू)

  4. 4 sajeev sarathie May 10, 2007 at 8:21 pm

    वाह …. भाई कभी हमे भी घर बुलायिये … तस्वीरों से कहे बहलाते हैं….

  5. 5 समीर लाल May 10, 2007 at 8:41 pm

    वाह भाई, चित्र में ही सही, बगिया का आनन्द ले लिया. बहुत बढ़िया.

  6. 6 paramjitbali May 10, 2007 at 10:51 pm

    अनामदास जी,शहरों ने सब छीन लिआ है।अब तो ऎसे बागों के सपने ही ले सकते हैं हम शहर वाले।

  7. 7 अभय तिवारी May 11, 2007 at 10:05 am

    भाईसाहब.. आपने तो ईष्या का जलाशय खोद दिया है मेरे भीतर..
    क्या करूं.. इस ताप का..
    ये तो किसी बगिया में ही ठण्डा हो सकता है..

  8. 8 ghughutibasuti May 11, 2007 at 12:05 pm

    बहुत सुन्दर बगिया है आपकी । आप लंगड़े का आनन्द लीजिये मैं केसर का लूँगी । अपनी बगिया की सैर कराने के लिये धन्यवाद ।
    घुघूती बासूती

  9. 9 प्रत्यक्षा May 11, 2007 at 3:47 pm

    और कौन से पंछी आते हैं ? जरा उन्हें भी दिखाईये ।

  10. 10 ranjana May 11, 2007 at 4:13 pm

    वह !!!क्या बात है आपकी बगिया की.. हमे तो आप सफ़ेद लिली ही दे दें:)

  11. 11 Manish May 11, 2007 at 6:00 pm

    क्या बात है हुजूर ! आपकी बगिया देख मन प्रसन्न हो गया ।


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