पिछले बुझौव्वल के बाद कई चिट्ठेकार साथियों ने मनोविनोद की इस स्पर्धा को जारी रखने की माँग की । पाठकों की माँग सिर -आँखों पर । अलबत्ता , इस बार की स्पर्धा में सवाल एक चिट्ठेकार साथी ने भेजे हैं ।
यह दोहरा दूँ कि उत्तर सिर्फ़ टिप्पणी के तौर पर दिए जा सकते हैं । प्रश्नों के जवाबों से अलग टिप्पणियाँ भी सिर माथे पर।जैसे सागर भाई ने पिछली बार टिपिया कर पूछा, ‘ अता - पता ?’ सागर भाई , इस बार सवाल के एक हिस्से में अता-पता भी होगा।
घुघूती और प्रमेन्द्र ने कहा कि प्रश्न कठिन थे । इस बार कुछ ‘ दूध - भात ‘ टाइप सवाल भी रखे गए हैं।
‘ दाल- भात ‘ वाले अभय भाई जवाब ‘ दूध - भात ‘ समझ कर बिन्दास देते हैं। उनकी खेल भावना के हम कायल हो गए । याद आ गया जब कक्षा ४ में कक्षा ११ के लड़कों के साथ एक मील की दौड़ में हमने भाग लिया था और दौड़ पूरी की थी ।
प्रश्न १ . संगीतकार आनन्द- घन का मूल नाम क्या है ?
प्रश्न २ . ‘ ये मुंह , मसूर की दाल ‘ यह गीत किस फिल्म का है ?
प्रश्न ३ . ‘ तेरी गलियों में हम आए , दिल ये अरमानों भरा लाए ‘ इसे किस - किस ने गाया है और फिल्म कौन सी थी ?
प्रश्न ४ . ‘ फिर सुबह होगी ‘ यह फिल्म किस उपन्यास के आधार पर बनी थी ?
प्रश्न ५ . ‘सत्यम , शिवम , सुन्दरम ‘ इस गीत के गीतकार का नाम बतायें ।
प्रश्न ६ . ‘ तूफ़ान मेल ये दुनिया ‘ इस गीत को किसने गाया है ?
प्रश्न ७ . ‘कोई गाता , मैं सो जाता ‘ गीतकार और फिल्म का नाम बतायें ।
जवाब दो जून , २००७ तक लिए जाएंगे ।










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