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दूर्लब्भ तस्वीरे.
Oh!अत्यंत दुर्लभ चित्र जो उस समय की भाषा बोल रहा है।
बहुत ही सुंदर..
bahot achha hai, pahe dafe ye chhabi maine dekhi.pahe tasavirme vinoba bhave gandhiji ke satha hai?
@ प्रवीणभाई , पहले चित्र में गाँधी जी कुष्ट से पीड़ित परचुरे शास्त्री की सेवा कर रहे हैं।विनोबा नहीं हैं। गाँधी जी द्वारा इनकी सेवा के बारे में पढिए - http://shaishav.wordpress.com/2007/01/15/gandhi-childhood-memoires-21/
परचुरे शास्त्री के बारे मे पिछले साल वर्धा गया था तो जानकारी मिली थी. यह चित्र भी वही देखा था. वहां ३ दिन रुका भी था.
अतुल