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यही है वह जगह
- वह प्यार : लाल्टू : कविताएँ June 18, 2009[ अब की गरमियों में पहला पड़ाव हैदराबाद था । जहाँ एक जानदार व्यक्ति - लाल्टू से मुलाकात हुई । उनकी कविताएँ मिलीं , पेश हैं । ] १ तुमने कहा अरे !अरे क्या ! मैंने कहा फिर लिया लेखा जोखा आपस में हमनेआपस के छूटे हुए दिनों कातुमने पिलाया पानीमैंने सोचा कब छूटेगा तुम्हारा बदनदिन [...] […]
- उ.प्र.चुनाव में कई मसलों की जड़ में एक व्यक्ति May 17, 2009चुनाव बाद दी गयी मेरी पहली त्वरित टिप्पणी पर अनूप शुक्ल ने कहा,” राहुलगांधी के बारे में जो चैनल वाले कह रहे हैं तो उनको कोई तो हीरो चाहिये ही तुरत-फ़ुरत प्रतिक्रिया करने के लिये। विस्तार से विष्लेषण कहां से करें बेचारे वे “ मौजूदा आम चुनाव में उत्तर प्रदेश की जनता ने जो परिणाम दिए [...] […]
- अंग्रेजी की दमघोंटू दीवार : ले. सुनील May 13, 2009बात मध्यप्रदेश की है, किन्तु कमोबेश पूरे देश पर लागू होती है। मध्यप्रदेश हाईस्कूल का परीक्षा परिणाम इस साल बहुत खराब रहा। मात्र 35 फीसदी विद्यार्थी ही पास हो सके। परिणाम निकलने के बाद प्रदेश के कई हिस्सों से छात्र-छात्राओं की आत्महत्याओं की खबरें आईं। इतने खराब परीक्षा परिणाम की विवेचना चल रही है। [...] […]
- दुनिया के आर्थिक संकट को कैसे समझें ? (२) – ले. सुनील May 12, 2009Technorati tags: recession, globalisation, global economic crisis, sunil, samajwadi janaparishad, capitalism, free trade, usa, china, india लेख का प्रथम भाग (4) दरअसल, पंजीवाद को फलते-फूलते रहने के लिए लगातार बढ़ते हुए मुनाफे, बढ़ता हुआ बाजार और दुनिया के श्रम व प्राकृतिक संसाधनों का बढ़ता हुआ दोहन चाहिए। तीस के दशक की जबरदस्त मंदी से उसे उबारने में [...] […]
- दुनिया के आर्थिक संकट को कैसे समझें ? – लेखक सुनील May 11, 2009यह लूट, लालच, भोग की सभ्यता का संकट है। Technorati tags: recession, global economic crisis, sunil, samajwadi janaparishad, capitalism, usa, china, india (1) दुनिया का आर्थिक संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। अमरीका के जिस दोयम कर्ज (सब प्राइम लोन) संकट से यह शुरु हुआ, उसको 19 महीने बीत चुके है। निवेश बैंक नाम की [...] […]
समाजवादी जनपरिषद
- शिक्षा अधिकार विधेयक एक छलावा है July 1, 2009एक आह्वान शिक्षा अधिकार विधेयक एक छलावा है, शिक्षा का बाजारीकरण एक विकृति है, देश के सारे बच्चों को मुफ्त, समतापूर्ण, गुणवत्तापू्र्ण शिक्षा के संघर्ष के लिए आगे आएं लोकसभा चुनाव में दुबारा जीतकर आने के बाद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के नए मानव संसाधन विकास मंत्री श्री कपिल सिब्बल ने कई घोषणाएं की हैं। अपने मंत्रालय का 100 दिन [...] […]
- बेतूल : महिला अत्याचार रपट : शिउली वनजा July 1, 2009म.प्र. का बैतूल जिला पुलिस द्वारा महिलाओं पर अत्याचार के लिए प्रसिद्ध होता जा रहा है। बीते दिनों बैतूल जिले में एक सप्ताह के अंदर दो घटनाएं घटी। पहले 27 मई को सारणी में निजी सुरक्षा गार्डों द्वारा महिलाओं के साथ छेड़खानी का विरोध होने पर गोली चलाकर एक आदिवासी युवक की [...] […]
- कांग्रेस के झूठ को पहचानना जरूरी है May 16, 2009जब बुनियादी सवालों पर प्रमुख दलों में वैचारिक अन्तर न रह गया हो तब हार – जीत के नकली कारण प्रकट होने लगते हैं । उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की आशा से अधिक सफलता से प्रफुल्लित मनमोहन सिंह से लगायत छुटभैय्ये कांग्रेसी और उनकी मस्केबाजी करने वाले टेवि चर्चाकार बेशर्मी से [...] […]
- नर – नारी समता और निजी कानून (३) , ईसाई और पुर्तगाली कानून : ले. डॉ. स्वाति May 13, 2009
- नर-नारी समता और निजी कानून (२) : ले. डॉ. स्वाति May 12, 2009पिछला भाग – एक हिंदु विवाह अधिनियम (1955 ) सतही तौर पर ’समता’ पर आधारित है । वह अदालत से तलाक मांगने का अधिकार स्त्री-पुरुष दोनों को देता है । 1976 के अधिनियम में तलाक के साधारण स्थापित कारकों के अलावा , क्रूरता (मानसिक/शारीरिक ), परित्याग करना व परस्पर रजामंदी भी तलाक के लिए पर्याप्त [...] […]
- नर – नारी समता और निजी कानून : डॉ. स्वाति May 11, 2009[ वरिष्ट अधिवक्ता एवं लोकप्रिय चिट्ठेकार दिनेशराय द्विवेदी ने कल सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक नि:संतान हिन्दू विधवा द्वारा अर्जित सम्पत्ति पर विवाह के तीन माह बाद गुजर गये पति के वारिसों का हक मुकर्रर करने के फैसले का विवरण अपने चिट्ठे पर दिया था । दिनेशजी ने उक्त पोस्ट में फैसले की बारीकियों को अत्यन्त [...] […]
- सूअर – ज्वर या सभ्यता – ज्वर ? (2) ले. सुनील May 9, 2009पिछले हिस्से से आगे ए. काकबर्न नामक विद्वान ने दुनिया के मांस-इतिहास पर एक पेपर लिखा है, जिसमें संयुक्त राज्य अमरीका के एक प्रमुख सूअर-मांस उत्पादक राज्य उत्तरी केरोलीना के बारे में बताया है- “बदबूदार खाडियों के चारों और सूअरों के अंधेरे गोदाम बने हुए है, जिनमें उन्हें धातु के कटघरों में रखा जाता है जो उनके [...] […]



दूर्लब्भ तस्वीरे.
Oh!अत्यंत दुर्लभ चित्र जो उस समय की भाषा बोल रहा है।
बहुत ही सुंदर..
bahot achha hai, pahe dafe ye chhabi maine dekhi.pahe tasavirme vinoba bhave gandhiji ke satha hai?
@ प्रवीणभाई , पहले चित्र में गाँधी जी कुष्ट से पीड़ित परचुरे शास्त्री की सेवा कर रहे हैं।विनोबा नहीं हैं। गाँधी जी द्वारा इनकी सेवा के बारे में पढिए – http://shaishav.wordpress.com/2007/01/15/gandhi-childhood-memoires-21/
परचुरे शास्त्री के बारे मे पिछले साल वर्धा गया था तो जानकारी मिली थी. यह चित्र भी वही देखा था. वहां ३ दिन रुका भी था.
अतुल