Entries from January 2007
January 22, 2007
बापू की गोद में : प्राक्कथन : दादा धर्माधिकारी
श्री नारायण देसाई कि ‘संत सेवतां सुकृत वाधे’ मूल गुजराती में पढ़ी । एक अनूठी कलाकृति है । उसमें आत्मकथा की सजीवता और प्रतीति है , फिर भी अहन्ता का दर्प नहीं है । जिन घटनाओं और परिस्थियों का वर्णन इस छोटी-सी पुस्तक में है , उनके साथ लेखक का घनिष्ठ और प्रत्यक्ष सम्बन्ध [...]
January 22, 2007
बापू की गोद में : प्रकाशकीय
वर्षों पूर्व ‘जन्मभूमि’ गुजराती – पत्र में प्रतिसप्ताह ‘स्वातंत्र्य संग्रामनी गाथा’ स्तम्भ में श्री नारायणभाई ने बापू के सम्बन्ध में धारावाहिक रूप में संस्मरण लिखे थे , जो बाद में ‘संत सेवतां सुकृत वाधे’ शीर्षक से पुस्तकाकार में प्रकाशित हो गये । सौभाग्य से आज वे हिन्दी में रूपान्तरित होकर पाठकों के समक्ष उपस्थित हैं [...]
January 22, 2007
बापू की गोद में : पुस्तक समर्पण
साबरमती नदी
और वर्धा की
हनुमान टेकड़ी
को
- नारायण.
Technorati tags: gandhi, childhood memoires
January 22, 2007
बापू की गोद में (२२) : अग्नि – परीक्षा
आगा खाँ महल में जाने के बाद छह दिनों के अन्दर काका का स्वर्गवास हो गया । उनकी मृत्यु के बारे में सरकार की ओर से हम लोगों को कोई समाचार नहीं दिये गये थे । हम सेवाग्राम में हैं , यह जानकारी सरकार को थी , फिर भी रेडियो पर खबर सुनकर मित्रों [...]
January 21, 2007
बापू की गोद में (२१) : ९ अगस्त , १९४२
८ अगस्त सन १९४२ की रात को बम्बई के बिरला हाउस में दो प्रकार की राय व्यक्त की जा रही थी । उस दिन शाम को ‘ भारत छोड़ो ‘ के प्रस्ताव पर बापू कांग्रेस – महासमिति की बैठक में भाषण कर चुके थे । काका का अभिप्राय था कि सारे राष्ट्र मे बिजली [...]
January 20, 2007
बापू की गोद में (२०) : जमनालालजी
सन १९४२ – ४३ का वर्ष भारत के इतिहास में बड़ि धूमधाम का था । देश में पिछले पचास वर्षों में जो परिवर्तन नहीं हो सके थे , वे इस एक ही वर्ष में हो गये । बापू के आश्रम की दृष्टि से देखा जाय तो १९४२ की फरवरी से ले कर १९४४ की फरवरी तक बापू ने पहले जमनालालजी , फिर [...]
January 19, 2007
बापू की गोद में (१९) : आक्रमण का अहिंसक प्रतिकार
सेवाग्राम में डाकघर खुल गया , तब हम मगनवाड़ी छोड़कर सेवाग्राम रहने गये थे । वहाँ हमारे लिए एक कुटिया बनायी गयी थी । यह कुटी बापू-कुटी के नजदीक थी । एक तरफ बा-कुटी , बीच में बापू - कुटी और दूसरी तरफ हमारी कुटी थी । बापू , बा और महादेवभाई की त्रिपुटी की [...]
January 18, 2007
बापू की गोद में (१८) : दूसरा विश्व-युद्ध और व्यक्तिगत सत्याग्रह
दूसरे विश्व-युद्ध ने दुनिया के इतिहास को एक नया मोड़ दे दिया । सम्राज्यवाद के पाँव-तले कुचले हुए , दुनिया के कई स्वातंत्र्योत्सुक देशों में इसके प्रत्याघात हुए । भारत ने इस युद्ध के सम्बन्ध में जो नीति अपनायी , उसका असर दुनिया के अनेक गुलाम देशों पर भी हुआ ।
प्रारम्भ में तो [...]
RSS - Posts