[पण्डितजी गरजकर बोले , ' दर्शन करने हों तो मेरे कर लो। गांधीजी आराम कर रहे हैं । उन्हे जगाने नहीं दूँगा' ]
बापू के साथ ट्रेन में सफर करने का अनुभव कुछ अनोखा ही था । उन दिनों बापू सामान्य थर्ड क्लास में सफर करते थे । उनके लिए स्पेशल डिब्बा ट्रेन में जोड़ने [...]
Entries from December 2006
December 31, 2006
वह अपूर्व अवसर : बापू की गोद में (११)
December 30, 2006
अग्निकुण्ड में खिला गुलाब : बापू की गोद में (१०)
[ 'अस्पृश्यता जैसे प्रश्न पर यदि मेरी इतनी गम्भीर ग़लतफ़हमी हुई हो तो मैं गांधीजी के विचारों को समझाने के काबिल नहीं। मैंने ही बापू को इतनी पीड़ा पहुँचायी तो दूसरों को रोकने का मुझे क्या अधिकार ? ' ]
‘ गांधी- सेवा- संघ ‘ की बैठकें हर साल अलग – अलग प्रान्तों में होती थीं। [...]
December 29, 2006
यज्ञसंभवा मूर्ति : बापू की गोद में ( ९ )
[ गुरुदेव ने अपने कोमल , करीब - करीब नारीतुल्य स्वर में 'जीवन जखन शुकाये जाय , करुणा धाराय एशो ' यह गीत गाया।...जीवन जिस दिन रीते उस दिन, करुणा धारा बन आना..]
यरवड़ा – जेल का लोहे का दरवाजा खुला , और दूसरा बन्द हुआ। फिर दूसरा खुला , तब पहला बन्द हुआ। खाकी [...]
December 26, 2006
बापू की प्रयोग – शाला : बापू की गोद में (८)
[ ..बापू ने कहा,'तेरी जगह मैं होता तो ध्यान से देखता। कोई शौच करके उठा हो तो तुरन्त वहाँ दौड़ जाता। उसके मैले में खराबी नजर आती , तो उससे नम्रतापूर्वक कहता,'देखो भाई,तुम्हारा पेट बिगड़ा है। तुमको अमुक इलाज करना चाहिए। इस तरह उसका हृदय मैं जीत लेता।]
सैकड़ों सालों की कंगाली के परिणामस्वरूप अज्ञान [...]
December 25, 2006
नयी तालीम का जन्म : बापू की गोद में (७)
राष्ट्र – जीवन के धड़कनों के साथ यदि आपका व्यक्तिगत जीवन भी धड़कता हो तो एक अपूर्व भाग्य ही माना जाएगा . मुझे यह भाग्य प्राप्त हुआ था . गांधीजी ने दुनिया को एक के बाद एक जो नयी देनें दीं , उनमें नयी तालीम एक अमूल्य रत्न माना जाएगा . नयी तालीम का विकास [...]
December 24, 2006
१९३० – ‘३२ की धूप – छाँह : बापू की गोद में (६ )
[..किसी आन्दोलन में खुले तौर पर स्त्रियों के शामिल होने की घटना भारत के इतिहास में एक नयी परम्परा डालने वाली थी... गंगाबहन की खादी की शुभ्र साड़ी उनके सिर पर से बहने वाली ख़ून से केसरिया रंग की बन गयी .]
भट्ठी की करामात देखो मेरे भाई .
भले – लोग दीवाने बन फिरें [...]
December 21, 2006
स्नेह और अनुशासन ( २ )
[ बापू का अनशन तो उनके शरीर और मन को निचोड़ ही देता था . बापू के आखिर - आखिर के कुछ उपवासों के समय खाना छोड़ने के कारण बापू का जितना वजन घट जाता था,उतना ही वजन कस्तूरबा और काका का खाते-पीते भी घटता हुआ मैंने देखा है . ]
साबरमती – आश्रम के बाहर बापू और काका के साथ रहने का मौका कुछ दिन के लिए [...]
December 20, 2006
स्नेह और अनुशासन : बापू की गोद में ( ५ )
[ ..जेल में नहीं रहते थे , तब रेल में रहते थे ... मेरे शैशव का पूरा काल , मुझे ऐसा जान पड़ता है , मानो वह हमारे बुजुर्गों की जेल - यात्राओं और दो जेल यात्राओं के बीच का काल हो . ]
पिताजी को मैं ‘ काका ‘ कहता था . आगे के [...]
December 18, 2006
हर्ष शोक का बँटवारा ( २ )
[ बापू के आश्रम में बापू का ही जन्मदिन ? यह कैसा शिष्टाचार ? ..खुद हिन्सा का प्रयोग भले न किया हो ,पर आश्रम के गीतों में भगतसिंह का गौरव कम नही था .]
गत प्रविष्टि से आगे
लेकिन इस तरह के धार्मिक और सामाजिक त्योहारों को भी पीछे छोड़ने वाली याद चरखा – जयन्ती ( रेटियो [...]
December 17, 2006
हर्ष – शोक का बंटवारा : बापू की गोद में ( ४ )
[ जीवन के प्रारम्भिक सात - आठ वर्षों का असर मनुष्य के मानस पटल पर कृष्णपक्ष की रात्रि के समान होता है ...किसी एक चन्द्रमा की प्रभा नहीं होती , बल्कि लाखों छोटी - बड़ी तारिकाओं की आभा छायी रहती है .]
जीवन के प्रारम्भिक काल के ( सात - आठ वर्ष के ) कितने प्रसंग मनुष्य को याद [...]
RSS - Posts