[आपात्काल के दौरान लिखी भवानी बाबू के कविताएं 'त्रिकाल सन्ध्या' में हैं.यहां बाल-कविता के रूप में लिखी एक कविता पेश है .आपात्काल में सक्रिय और बदनाम चार महानुभावों का सन्दर्भ स्पष्ट है.]
बहुत नहीं सिर्फ़ चार कौए थे काले ,
उन्होंने यह तय किया कि सारे उडने वाले
उनके ढंग से उडे,रुकें , खायें और गायें
वे जिसको त्यौहार [...]
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